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बागपत के आठ हजार गन्ना किसानों की जेब खाली

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बागपत। पिछले पेराई सत्र के आठ हजार किसान ऐसे हैं, जिनके खाते में अभी तक एक भी रुपया नहीं पहुंचा है। नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन इन किसानों को अभी भी पिछले पेराई सत्र के गन्ने के भुगतान का इंतजार है। घर के जरूरी कार्य लटक गए हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक किसानों को बकाया भुगतान दिलाने का एलान किया है। बागपत, रमाला और मलकपुर चीनी मिल की बात करें तो इन मिल क्षेत्रों के 8299 किसान ऐसे हैं, जिन्हें पिछले पेराई सत्र का एक भी रुपया भुगतान का नहीं मिला है। ऐसे में इन किसानों को परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। शादी से लेकर घर के अन्य जरूरी कार्य लटक गए हैं। नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है, इसके बाद भी इन किसानों को सिर्फ पिछले पेराई सत्र के भुगतान का ही इंतजार है। किसानों ने कहा सीएम योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक भुगतान का एलान किया, इससे उन्हें उम्मीद बंधी है।


यह है किसानों का गणित
बागपत। बागपत, रमाला और मलकपुर चीनी मिल को पिछले पेराई सत्र में 75126 किसानों ने गन्ना आपूर्ति की। इनमें सबसे ज्यादा 34767 किसान मलकपुर चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करने वाले हैं, लेकिन मलकपुर मिल ने अभी तक 28227 किसानों को भुगतान किया है। तीनों मिल क्षेत्र में कुल 66827 किसानों को भुगतान शुरू हुआ है। गन्ना विभाग के 15 नवंबर तक आंकड़ों के मुताबिक 8299 किसान ऐसे हैं, जिन्हें अभी एक भी रुपये का भुगतान नहीं हुआ है।
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इंतजार में किसान, 544 करोड़ रुपये बकाया
बागपत। जिले के किसान पश्चिम उत्तर प्रदेश की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। पेराई सत्र 2017-18 में किसानों के करीब 544 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना विभाग के 15 नवंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक बकाया मलकपुर चीनी मिल पर है।


किसने क्या कहा
सपा नेता सुरेंद्र पंवार कहते हैं कि सरकार के तमाम वायदे झूठे हैं। किसान इन झूठे वायदों में पिस रहे हैं। जिन किसानों का भुगतान नहीं हुआ, आखिर वह कैसे अपना घर चला रहे हैं, सरकार को इसकी चिंता नहीं है।
युवा रालोद के जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर कहते हैं कि सरकार को अगर किसानों की चिंता है तो बकाया भुगतान पर ब्याज दिलाएं। किसानों की बिजली काटी जा रही है, लेकिन भुगतान पर बार-बार वायदे किए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता राकेश शर्मा कहते हैं कि सरकार ने किसानों का हित करने का ढोंग किया है। अब तक बकाया भुगतान क्यों नहीं हुआ। धान की फसल बेचने के लिए किसानों को हरियाणा क्यों जाना पड़ता है। रास्तों की हालत किसी से छिपी नहीं है।
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