बागपत। चौधरी चरण सिंह की तीसरी नंबर की बेटी ज्ञानवती (81) के निधन से जिले में भी शोक की लहर दौड़ गई। छपरौली विधानसभा के चुनाव प्रचार में ज्ञानवती जरूर शामिल होती थी। अलीगढ़ से उनका राजनीतिक रिश्ता रहा और वह दो बार विधायक चुनी गई, लेकिन बागपत से उनका हमेशा भावनात्मक रिश्ता रहा। परिवार के साथ वर्तमान समय में गुड़गांव में रह रही थीं।
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ अजित सिंह की बहन और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की बुआ ज्ञानवती देवी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की तीसरे नंबर की बेटी थी। वह अलीगढ़ के खैर और इगलास से विधायक रहीं। रविवार को सुबह के समय गुड़गांव (हरियाणा) के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया। जनता दल के टिकट पर इगलास से 1991 में चुनाव जीती और इसके बाद खैर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1996 में विधायक बनीं। पूर्व विधायक महक सिंह ने बताया कि ज्ञानवती छपरौली के चुनाव में प्रचार के लिए जरूरत आती थी। महिलाओं के बीच वह अपनी बहनों और माता गायत्री देवी के साथ जाती। बागपत से उनका स्नेह का नाता रहा।
जयंत चौधरी के कार्यक्रम स्थगित
बागपत। पूर्व विधायक ज्ञानवती के निधन से जिले में शोक की लहर रही। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को रविवार को जिले में कई कार्यक्रमों में शामिल होना था। उनके निधन के कारण रालोद ने कार्यक्रम स्थगित कर दिए।
बिजनौर की राजनीति में किस्मत आजमा चुकी थी ज्ञानवती
बिजनौर। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की बहन ज्ञानवती का बिजनौर से पुराना नाता रहा है। ज्ञानतवी की ससुराल बिजनौर में है। उनकी शादी बिजनौर के कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव हाजीपुर निवासी आईपीएस अफसर सतेंद्र प्रसन्न सिंह से हुई थी। सतेंद्र प्रसन्न सिंह महाराष्ट्र में डीजीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ज्ञानवती ने बिजनौर की राजनीति में भी किस्मत आजमाई पर उन्हें सफलता नही मिली। ज्ञानवती ने 1993 में चांदपुर की मिनी छपरौली कही जाने वाली सीट से विधान सभा का रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गई थी। उन्हें 16 हजार वोट मिले थे। इसके बाद उन्होंने बिजनौर से कोई चुनाव नही लड़ा। ज्ञानवती के देवर सुरेंद्र पाल सिंह बिजनौर के पास गांव आदोपुर में रहते हैं। इस गांव में भी उनका खूब आना जाना लगा रहता था। रालोद के नेता भी अपनी सिफारिश ज्ञानवती से लगवाने के लिए आदोपुर गांव में डेरा डाले रहते थे।
डॉ. ज्ञानवती का अलीगढ़ की राजनीति से रहा है गहरा नाता
अलीगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह की बेटी व रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह की बहन डॉ. ज्ञानवती सिंह (81) का रविवार की सुबह गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही यहां रालोद नेताओं व कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. ज्ञानवती का अलीगढ़ की राजनीति से गहरा ताल्लुक था। वह यहां से इगलास और खैर से विधायक चुनी गईं। आस-पास के अन्य जिलों में भी उनकी राजनीतिक सक्रियता रही थी।
चौ. चरण सिंह के परिवार का इस जिले की राजनीति से गहरा नाता रहा है। उनकी पत्नी गायत्री देवी मिनी छपरौली कही जाने वाली इगलास विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1969 में विधायक चुनी गईं। वह भारतीय क्रांति दल से विधायक निर्वाचित हुईं थीं। चौ. चरण सिंह की पुत्री डॉ. ज्ञानवती सिंह भी इस जिले की राजनीति में काफी सक्रिय रहीं। वे 1991 में जिले के इगलास विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुुनी गईं। उसके बाद उन्होंने जाट बाहुल्य क्षेत्र खैर से भी चुनाव लड़ा। वह वर्ष 1996 में खैर से भी भाजपा से विधायक चुनी गईं। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के जगवीर सिंह को पराजित किया। बाद में वह निकटवर्ती मथुरा जिले की राजनीति में सक्रिय रहीं। वर्ष 2004 में उन्होंने अपना आखिरी चुनाव मथुरा संसदीय सीट से लड़ा लेकिन इस चुनाव में वह हार गई। रालोद के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. अनिल चौधरी बताते हैं कि डॉ. ज्ञानवती ने अपने पिता चौ.चरण सिंह की तरह गरीबों, किसानों, महिलाओं के लिए काम किया। वर्तमान में भी वह रालोेद की सदस्य थीं। उनके पति महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस थे और मुबंई के पुलिस कमिश्नर भी रहे थे।
उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालोें में पूर्व विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष चौ. रामबहादुर सिंह, रालोद महानगर अध्यक्ष अब्दुल्ला शेरवानी, छात्र नेता जियाउर्रहमान, डॉ. इरफान खान, सुमन दिवाकर, सलमान शेरवानी, ,संजीव चौधरी, अमित चौहान, चौ. हम्मीर सिंह, महीपाल सिंह, राधेश्याम, आदिल आदि शामिल हैं।
बेबाक और जुझारू नेता थीं
खैर। डा. ज्ञानवती के निधन से उनके समर्थकों में शोक की लहर है। कस्बे के भाजपा नेता सुनील पांडे, सुशील गर्ग, पूर्व चेयरमैन पुरुषोत्तम गर्ग, अजीत तोमर, भूपेंद्र शर्मा एडवोकेट उनके काफी निकटस्थ रहे थे। उन्होंने खैर में गौमत चौराहे पर अपने पिता चौधरी चरण सिंह की आदमकद मूर्ति स्थापित कराई थी। लोगों का कहना है कि जनता के बीच लोकप्रिय होने के साथ वह ईमानदार, बेबाक और जुझारू नेता थीं। खैर से टप्पल तक उन्होंने कई प्रमुख सड़कों का निर्माण कराया था। उनके निधन पर पूर्व चेयरमैन पुरुषोत्तम गर्ग, सुखदेव गर्ग, भाजपा नेता सुशील गर्ग, सुराज गौतम, मीना कुमारी, मनू चौधरी, दिनेश अग्रवाल, हमवीर सिंह आदि ने गहरा दु:ख व्यक्त किया है।
गोरई में इंटर कालेज की स्थापना की
इगलास। डॉ. ज्ञानवती सिंह के निधन पर क्षेत्र के लोगों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। डॉ. ज्ञानवती ने अपनी माता गायत्री देवी के नाम से गोरई क्षेत्र में इंटर कालेज की स्थापना की। बाद में इस विद्यालय को राजकीय इंटर कालेज के रूप में शासन से मान्यता प्रदान कराई। निधन की खबर पर रालोद नेता चौ. नवाब सिंह, डा. संजय सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य रनवीर सिंह, विजयपाल सिंह, रामअवतार सिंह सहित अन्य लोगों ने शोक व्यक्त किया। उनके करीबी नेता रहे नवाब सिंह छोंकर ने बताया कि डॉ. ज्ञानवती ने एमबीबीएस में लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज को टॉप किया था।