बड़ौत (बागपत)।
पग घुंघरू बांध चल पड़े हैं आस्था की डगर पर। मन और मंदिर में जली है भक्ति की अखंड जोत। कंधों पर कांवड़ और पांव मेें घुंघरू की झंकार कांवड़ यात्रा को संगीतमय बना रहे है। सुर-ताल का ऐसा संगम बन रहा है कि मन भावन श्रावण माह हो रहा है।
जितना सुंदर और सुव्यवस्थित कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों के डग भरने का अंदाज है, उतना ही सुंदर उनके पांव मेें बंधे घुंघरूओं से निकलता संगीत भी। कांवड़िया पंक्तिबद्ध होकर डग भर रहे हैं, तो उनके पैरों पर बंधे घुंघरू छन-छन-छन की झंकार मधुर संगीत पैदा कर रहे हैं। यह संगीत किसी मास्टर किसी मास्टर के अनेकों वाद्यों में पिरोये संगीत को भी मात दे रहा है। एकदम अद्भुत अलौकिक। बीच-बीच मेें कांवड़ियों की बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारे हैं, जो इसे और भी अद्भुत बना रहे हैं। इसे संगीन ने सब कुछ शिवमय कर दिया है।