बड़ौत (बागपत)। लोयन मलकपुर गांव के ग्रामीणों के गांव के प्राइमरी पाठशाला नंबर एक मेें आवारा पशु बांधने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। एसडीएम के आदेश पर शिक्षा विभाग के अफसरों ने बच्चों को अब गांव के ही प्राइमरी पाठशाला नंबर 2 में भेजा, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
नगर व क्षेत्र के ग्रामीण व किसान बढ़ती आवारा पशुओं की संख्या से अजीज आ चुके हैं। अब ग्रामीणों ने आवारा पशुओं को विद्यालयों में बंद करना शुरू कर दिया है। लोयन मलकपुर गांव के ग्रामीणों ने देर शाम गांव के अधिकांश आवारा पशुओं को गांव की प्राइमरी पाठशाला नंबर एक में बंद कर दिया। बुधवार की सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो वहां आवारा पशुओं को बंधा देख अधिकांश अपने घर लौट गए। कुछ बच्चे पढ़ने की जिद पर अडे़ रहे। विद्यालय की प्रधानाध्यापक शैली चौधरी ने इसकी जानकारी एबीएसए विनोद वर्मा को दी तो वे तुरंत पहुंचे और सभी बच्चों को गांव के ही प्राइमरी पाठशाला नंबर 2 मेें भेजा।
उधर, बच्चों की पढ़ाई को खराब होता देखकर अभिभावकों ने कहा गांव के असामाजिक लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए यह सब किया है। यदि वे आवारा पशुओं से अजीज जा चुके हैं तो जंगल में घेराबंदी कर उनकी व्यवस्था वहां की जा सकती थी, विद्यालय में बंद करने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। प्रधानाध्यापक शैली चौधरी ने बताया कि विद्यालय में 105 बच्चे पंजीकृत हैं। आवारा पशुओं को विद्यालय मेें देख अधिकांश बच्चे को घर लौट गए। जो बच्चे है, उन्हें शिक्षा दिलाई जा रही है। एबीएसए विनोद वर्मा ने कहा ग्रामीणों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे विद्यालय से आवारा पशुओं को निकाल लें। प्रशासन की भी मदद ली जा रही है। उधर, एसडीएम आशीष कुमार ने कहा शीघ्र ही बदरखा गांव मेें गोशाला खोल दी जाएगी, वहीं पर आवारा पशुओं को भेजा जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों से भी विद्यालय से आवारा पशुओं को निकालने की अपील की जा रही है।