बड़ौत (बागपत)। 13 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद् मनस्संज्ञिनी हाल ही में राजस्थान के विश्वविख्यात गांव पिपलांतरी पहुंची। पिपलांतरी पिछले दस वर्षों में अपनी बेटियों के सशक्तिकरण और जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए देश-विदेश में ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं। पिपलांतरी के लोगों को जब मनस्संज्ञिनी के द्वारा देश-विदेश में पर्यावरण, नदियों, जंगलों और समूची प्रकृति के पुनरुज्जीवन के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे प्रकृति पुत्री के सम्मान से सम्मानित किया।
मनस्संज्ञिनी ने पिपलांतरी के सरपंच श्री श्याम सुंदर पालीवाल और उनके सहयोगी भंवर सिंह से गांव में बेटियों के सशक्तिकरण और जल एवं पर्यावरण संरक्षण के विषय में किए गए कार्यों के बारे में जानकारी ली और उन कार्यों के परिणाम परोक्ष रूप से देखे। मनस्संज्ञिनी ने बड़ौत लौटकर बताया कि कैसे पिपलांतरी के लोग हर बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाते हैं और बेटियां हर रक्षाबंधन पर इन पेड़ों को राखी बांधती हैं।
मनस्संज्ञिनी ने देखा कि कैसे पिपलांतरी में वाटर शेड मैनेजमेंट द्वारा वर्षा के जल की एक-एक बूंद बचाई जाती है, इससे पिछले दस वर्षों में यहां का जलस्तर ऊपर आ गया है। वहां की माँ और बेटियां जैविक और आयुर्वेदिक जड़ी बूटी की खेती पर आधारित लघु उद्योग चलाकर अपने पिपलांतरी ब्रांड के उत्पाद देशभर में बेच रही हैं। मनस्संज्ञिनी के अनुसार, पिपलांतरी का लिंग अनुपात पूरे राजस्थान से और भारत की औसत दर से कहीं अधिक है।
पिपलांतरी के लोगों को मनस्संज्ञिनी ने अपने चीनी कम चीनी बंद अभियान के विषय में बताया। इस पर गांव के लोगों ने संकल्प लिया कि पूरा गांव चीनी बंद कर गुड़ और शक्कर अपनाने की शुरुआत करेगा ।
मनस्संज्ञिनी ने पिपलांतरी में एक जमीन के बड़े भाग पर 1,100 पेड़ अपने नाम से लगवाने का कार्यक्रम शुरू कर उस भूमि खंड को गोद लिया, इसका नाम मनस्संज्ञिनी वन रखा हैं। इस जमीन पर मनस्संज्ञिनी ने 100 विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगवाए हैं, जो आयुर्वेद के अनुसार औषधीय माने जाते हैं। साथ ही मनस्संज्ञिनी ने पिपलांतरी में 2,000 गायों पर आधारित बायो गैस संयंत्र लगाने का भी निर्णय लिया, इसके निवेश और निर्माण योजना की वह गांव की युवा टीम के साथ मिलकर कार्यान्वित करेगी ।