बागपत। प्रदेश की भाजपा सरकार ने गन्ना मूल्य घोषित कर दिया है। इस बार गन्ने के भाव में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। किसानों को कम से कम दस रुपये गन्ना बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी। विपक्ष का कहना है कि किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार का किसान विरोधी चेहरा साफ हो गया है। सीएम योगी आदित्य नाथ ने 30 नवंबर तक पिछले पेराई सत्र के भुगतान का भरोसा किसानों को दिया था, देखते हैं यह वायदा पूरा होता है कि नहीं।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि सरकार से किसान भाव में बढ़ोत्तरी की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन निराशा हाथ लगी। लागत मूल्य के हिसाब से ही एक सौ रुपये की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी। सरकार की रवैये से किसान निराश है।
रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह गठीना का कहना है कि सरकार का असली चेहरा किसानों के सामने आ गया है। भाव में एक भी रुपये की बढ़ोत्तरी नहीं करके किसानों का मजाक बना दिया गया है। सरकार की नीति का विरोध किया जाएगा।
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा कि किसान विरोधी सरकार है। भाजपा सरकार सिर्फ बातें करती हैं, एक भी काम किसी भी वर्ग के हित में नहीं करती। आमजन सरकार की नीति और नियत को अब समझ चुका है ।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राम कुमार चौधरी का कहना है कि किसान अपनी वोट की ताकत से भाजपा को करारा जवाब देगा। गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए थी। सरकार का रवैया बेहद निराशाजनक है। किसानों के बीच निराशा छा गई है।
बसपा के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित का कहना है कि गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी। सरकार की नीति सिर्फ फाइलों में ही सिमटकर रह जाती है, धरातल पर कुछ नहीं दिखता है।
दम तोड़ रही भुगतान की उम्मीदें
बागपत। पिछले पेराई सत्र के एकमुश्त भुगतान की उम्मीद भी दम तोड़ रही है। सरकार के वायदे का शुक्रवार का आखिरी दिन है। प्रभारी जिला गन्ना अधिकारी विनीत कुमार का कहना है कि अभी वह इस विषय में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बता सकते है।