बड़ौत (बागपत)। एलाचार्य अतिवीर महाराज ने कहा कि जैसे विचार हमारे मन में दूसरों के प्रति होते हैं, वैसे ही सामने वालों के विचार हमारे लिए हो जाते हैं।
वे बृहस्पतिवार को लोहिया बाजार मेेें भारतीय वर्षीय दिगंबर जैन धर्म संरक्षणी महासभा के तत्वावधान में धर्मसभा मेें बोल रहे थे। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य शांति सागर महाराज के चित्र का अनावरण धनपाल जैन ने किया। दीप प्रज्जवलन शेखर व संजय जैन ने किया। पादप्रक्षालन सुनील जैन, प्रसाद वितरित राजेश जैन ने किया। एलाचार्य अतिवीर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि औषधि से अधिक प्रभावशाली मनुष्य के विचार होते हैं तथा तीर से घातक मनुष्य के विचार हैं। यदि हमारे विचार शुद्ध हैं तो हमारे जीवन में शुद्धता आ जाएगी। जिस प्रकार मोबाइल में जो नंबर मिलाते हैं, वहीं पर घंटी बजाते हैं। उसी प्रकार यदि हाथ मेें अंगार लेकर पड़ोसी पर इस आशय से फेंके कि उसके घर में आग लगे, लेकिन तुम्हारा घर जल जाएगा। दूसरों के प्रति अच्छी सोच पर ही हमारा भला होता है। संचालन डा. श्रेयांस जैन ने किया। हिमांशु अलंकार ने कविता प्रस्तुत की। अशोक नागर मध्यप्रदेश से पधारे बालब्रहचारी, राज किंग भैया ने 15 से 17 जून तक 24 तीर्थंकर विधान के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संदीप जैन, मनोज जैन, योगेश जैन, अमित जैन, वरदान जैन, सुभाष, मुकेश जैन, अशोक जैन, महेंद्र जैन, धनपाल जैन, सुनील जैन, रमेश जैन, अनिल जैन, राजेश जैन, जितेंद्र जैन, पवन जैन, विजय, नरेंद्र, राजेश भारती, संजय आदि मौजूद रहे।
अहंकार से होती है पतन की शुरुआत
बड़ौत। जैन स्थानक शहर में बसंत मुनि ने धर्मसभा में कहा कि व्यक्ति में अहंकार होने से उसके पतन की शुरूआत हो जाती है। अपनी आत्मा में अपमान का बदला अपमान करने से नही होना चाहिए। अपमान करने वाला अज्ञातन ज्ञानी कहलता है। राजीव जैन ने संचालन किया। जयप्रकाश जैन, कृष्ण जैन, हेमचंद, अमित, विनोद जैन, डीके जैन, मुकेश, अतुल, सतीश, प्रवीण जैन, संजय जैन उपस्थित रहे।