बागपत। अब गांवों की संस्कृति की धरोहर को विकास से जोड़ने के लिए पहल शुरू कर दी गई है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में हर वर्ष तीन गांव चयन किया जाएगा। सिनौली, पुरा और बरनावा को चयन सूची में रखा गया है। शासन की ओर से अंतिम तौर पर सूची फाइनल होगी। चयनित गांवों में एक करोड़ रुपये से विकास कार्य होंगे।
शासन ने गांवों के समग्र विकास और पर्यटन को जोड़कर नई योजना तय की। इसके तहत जिले में हर वर्ष अधिकतम तीन गांव चयनित होंगे। सीडीओ पीसी जायसवाल ने बताया कि नियम यह होगा कि गांव के इतिहास और परंपरा के मान्य अभिलेख होंगे। योजना को परवान चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार एक गांव को एक करोड़ की धनराशि दी जाएगी। जो गांव हस्तशिल्प कला, बुनकर, हथकरघा की बहुलता वाले होंगे। उन्हें धनराशि भारत सरकार के कपड़ा और पर्यटन मंत्रालय से भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। गांवों की सांस्कृतिक धरोहर अब वहां के विकास की बुनियाद बनेगी। सदियों पुरानी खास परंपरा, प्रचलित कला को विकास की कड़ी बनाते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं जाएंगे। सिनौली, पुरा और बरनावा का चयन होने की उम्मीद है। उत्खनन में मिले करीब चार हजार साल पुराने अवशेषों से यह गांव फिर से चर्चाओं में है।
यह होंगे काम
बागपत। परंपरागत हस्तशिल्प भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। हस्तशिल्प को बढ़ावा देने कार्यशाला और प्रशिक्षणों का आयोजन होगा। इसके माध्यम से युवक अपने क्षेत्र में ओर प्रगति कर सके। गांव में जल क्रीड़ा, साहसिक खेलों के लिए उपकरण अथवा इको फ्रेंडली परिवहन सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। पार्कों का निर्माण होगा और पूरे गांव की चहारदीवारी भी बनेगी। वहां के आधारभूत ढांचे एवं संपत्ति के रख रखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत अथवा निजी क्षेत्र के संगठनों की होगी। गांवों का यह विकास प्रदेश सरकार की पर्यटन नीति का हिस्सा होगा।
यह है योजना का उद्देश्य
गांवों के समग्र विकास के लिए ग्रामीण विकास की अन्य योजनाओं के साथ समन्वय करना। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिए पर्यटन जनित रोजगार के अवसरों का सृजन करना। ढांचागत विकास के जरिए ग्रामीण दस्तकारों एवं कलाकारों का सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन करना। परंपरागत कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देना। मूलभूत सुविधाएं तथा स्वस्थ वातावरण तैयार करना। पर्यटन के सतत विकास के लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास होगा।