बागपत। शहर की कोर्ट रोड गली नंबर छह निवासी बालेश अपने हौसले से महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। शहर के एक प्राइवेट स्कूल के ऑफिस में नौकरी करती है। इसके अलावा वह दोपहर के समय ई-रिक्शा चलाकर पति का सहयोग करती है। बालेश का कहना है कि महंगाई बहुत है। हर सामान की कीमत आसमान छू रही है। सभी के सहयोग से परिवार का पेट पाला जा रहा है। उन्होंने खुद की मेहनत से ई-रिक्शा तैयार की। इसके बाद परिवार की आमदनी बढ़ी। स्कूल से बच्चों को लाने और ले जाने का काम भी वह करती है।
माया बोली, मुझे चाहिए मेरा हक
बागपत। डौला गांव की एक महिला माया देवी पांच साल से विधवा पेंशन बनवाने के लिए अफसरों की दरवाजे पहुंचकर कार्रवाई की मांग कर चुकी है, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार चलाने के लिए नाबालिग बेटा नौकरी करना चाहता है, लेकिन उसके कोई नौकरी देने को तैयार नहीं है। पति की पांच वर्ष पूर्व मौत होने के बाद से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। 20-25 गज के मकान में जीवन यापन कर रही है। पेंशन के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन प्रशासन स्तर से उसे निरस्त करा दिया जाता था। सीडीओ चांदनी सिंह का कहना है कि जांच कराई जाएगी।
प्रेरणा बन गई चांदनी सिंह और अन्नपूर्णा गर्ग
बागपत। जिला प्रशासन में महिला अधिकारियों की खास जगह है। सीडीओ चांदनी सिंह और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अन्न पूर्णा गर्ग आईएएस हैं। महिलाओं के लिए दोनों आइडियल हैं। सीएमओ के पद पर डॉ. सुषमा चंद्रा हैं। सीओ खेकड़ा वंदना शर्मा भी युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। इसके अलावा जिला दिव्यांग जन अधिकारी पारिसा हैं।
सियासत में चमकी रेणू धामा, संगीता और बबीता
बागपत। जिले में महिला जनप्रतिनिधियों का भी राज है। जिला पंचायत अध्यक्षा रेनू धामा है। खेकड़ा पालिका की चेयरमैन संगीता धामा है। वहीं दोघट की चेयरमैन बबीता भी निकाय चुनाव में निर्वाचित होकर क्षेत्र पहली बार चेयरमैन बनीं है।