बागपत। निवाड़ा की झुग्गी-झोंपड़ी में रह रहे सलमू और सलामती के परिवार के छह गायब बच्चों में सोनू के बाद अब पुलिस ने खैरूना और गुलिस्तां को भी हैदराबाद से बरामद कर लिया है। दोनों लड़कियां वहां पर एक आश्रम में रह रही थी। उनका दावा है कि वह पहले दिल्ली और फिर हैदराबाद गए। चाइल्ड हेल्प लाइन के माध्यम से वह आश्रम पहुंची। भीख मांगकर गुजारा भी किया।
निवाड़ा गांव में अलग-अलग झुग्गी में रहने वाले भाई-बहन सलमू और सलामती का कहना है कि 14 जनवरी को उनके परिवार के छह बच्चे संदिग्ध हालात में गायब हो गए थे। इनमें सलामती की बेटी गुलिस्तां (7), पोती खैरून (11), मेहरूना (9), पोता गुड्डू (7), सोनू (6) और भतीजा सात वर्षीय दिलशाद (सलमू का बेटा) शामिल थे। दो फरवरी की रात सोनू खुद ही घर लौट आया था। सोनू से पूछताछ के बाद पुलिस ने हैदराबाद में डेरा डाल लिया। एसआई के प्रसाद ने बताया कि खैरून और गुलिस्तां एक चाइल्ड हेल्प लाइन के माध्यम से लड़कियां के लिए चलाए जाने वाले राजकीय बालिका छात्रावास में भेजे गए थे। पुलिस टीम ने जांच के बाद दोनों को वहां से बरामद कर लिया और बृहस्पतिवार को दोनों को लेकर पुलिस लौट आई है।
ऐसे सुर्खियों में आया प्रकरण
बागपत। इस परिवार की लड़की खैरूना लापता हो गई थी। उसको तलाश करने के लिए 12 वर्षीय मीना अपने दिव्यांग पिता सलमू के अलावा मां और भाई के साथ हरिद्वार गई । वहां पर उनका घोड़ा चोरी हो गया था। वह बुग्गी खींचकर शामली तक लेकर आई थी। शामली प्रशासन ने उन्हें घोड़ा खरीदकर दिया था। यहीं से सलमू के परिवार के विषय में लोगों को जानकारी मिली। वह दोबारा हरिद्वार अपने पिता के साथ उसको तलाश करने गई थी। सलमू के मुताबिक वहां से ढाई माह पूर्व उसकी बेटी मीना का तीन-चार युवक अपहरण करके ले गए। जो अभी तक नहीं मिली है। उधर, खैरूना किसी तरह लखनऊ के लीलावती मुंशी निराश्रित बालगृह में पहुंच गई थी। वहां से कोतवाली पुलिस 24 अक्तूबर 2017 को बागपत लेकर आई थी। उसको बहला-फुसलाकर अपहरण करने के आरोप में एक किशोरी अभी भी जेल में बंद है। सलमू का कहना है कि उसके परिवार की मेहरूना (9), पोता गुड्डू (7) और सात वर्षीय दिलशाद अब भी लापता हैं।