बागपत। देहरादून के रणवीर एनकाउंटर में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद रणवीर के पिता रविंद्र पाल ने कहा कि 11 पुलिसकर्मियों को बरी करने से वह निराश हैं। इंसाफ की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी। उनका बेटा निर्दोष था और न्याय के लिए उनका परिवार संघर्ष करता रहेगा।
वर्र्ष 2009 में देहरादून में पुलिस की फर्जी मुठभेड़ का शिकार हुआ रणवीर मूल रूप से बागपत के निरोजपुर एम्मा गांव का रहने वाला था। परिवार वर्तमान समय में गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में रहता है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रणवीर के पिता रविंद्र पाल ने कहा कि फैसले से निराशा हुई है। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2014 में जो फैसला सुनाया था, उससे उम्मीद थी कि हाईकोर्ट सजा को फांसी में बदलेगा। हाईकोर्ट के फैसले पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन बेटे के लिए इंसाफ की जंग जारी रहेगी। सबको पता है कि उनका बेटा निर्दोष था। पुलिस ने उसकी हत्या की, जिसके लिए उन्हें फांसी होनी चाहिए। हाईकोर्ट के फैसले से वह निराश जरूर है, लेकिन इंसाफ की लड़ाई को जारी रखेंगे।
निरोजपुर में घर पर लटका ताला
बागपत। निरोजपुर एम्मा में रणवीर के घर पर ताला लटका मिला। उसके पिता रविंद्र पाल ने बताया कि परिवार के सदस्य कई साल से गाजियाबाद में जाकर रहने लगे हैं।
ग्रामीणों ने कहा, होनी चाहिए फांसी
बागपत। निरोजपुर गांव में भी दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की चर्चा रही। एक घेर में बैठे ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे पुलिसकर्मियों को फांसी होनी चाहिए। निर्दोष युवक की हत्या करके पुलिस ने अपराध किया था। सुप्रीम कोर्ट ही अब इस केस का इंसाफ कर दोषियों को सजा देगा। पुलिस का रवैया बेहद गलत था, जिसकी सजा मिलनी ही चाहिए।
क्या कहा प्रधान ने?
ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने कहा कि रणवीर सीधा-साधा युवक था। पुलिस ने अपराध किया था, इसलिए सात पुलिसकर्मियों को नहीं, बल्कि 18 के 18 पुलिसकर्मियों को सजा होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ही न्याय देगा।
भविष्य तलाशने गया था, पुलिस ने दे दी मौत
बागपत। छात्र रणवीर मेरठ में नौकरी कर रहा था। बेहतर भविष्य की तलाश में उसने देहरादून जाने का फैसला किया। उसके पिता रविंद्र पाल बताते हैं कि रवानगी से चार दिन पहले ही वह घर आया था। बेटे ने कहा था कि देहरादून में नौकरी और भविष्य का बेहतर विकल्प है। पिता और परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी, लेकिन चार दिन बाद ही उसके मारे की सूचना दी । परिवार आज भी इस गम से नहीं उबर पाया है। चहेेते रणवीर की मौत से परिवार का हर सदस्य टूट गया है। पुलिस से भरोसा उठ चुका है। रविंद्र पाल कहते हैं कि अब तक सुप्रीम कोर्ट ही उनका सहारा बचा है।