बिनौली (बागपत)। जाल में फंसा देख शिकारियों के होश उड़ गए, लेकिन बहादुर किसान करीब आधे घंटे तक तेंदुए को पिंजरे में ही दबाए बैठे रहे। गांव से युवा जरूर पहुंचे, लेकिन वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। पुलिस भी देरी से पहुंची। जाल कमजोर निकला, इस कारण तेंदुए आसानी से जंगल में भाग गया।
बिनौली-बरनावा गांव के जंगल में शिकारियों ने सूकर को पकड़ने के लिए जाल लगाया था, लेकिन तेंदुआ फंस गया। तेंदुआ फंसा देखा शिकारियों के होश उड़ गए। शिकारी चिल्लाने लगे तो आसपास के किसान मौके पर पहुंचे। किसान विनोद कुमार ने बताया कि किसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली के पहिये के नीचे जाल का एक कोना दबाया गया। कोशिश यह की जा रही थी कि तेंदुए को नुकसान न हो और मदद मिलने तक वह जाल में ही फंसा रहे। वन विभाग के अलावा गांव में कॉल कर दी गई थी। कुछ युवक मदद के लिए पहुंचे, लेकिन वह भी खाली हाथ थे। इस बीच जाल कमजोर होने के कारण तेंदुआ उसे काटकर जंगल की तरफ भाग निकला। वन विभाग की टीम समय पर पहुुंचती तो तेंदुआ पकड़ा जा सकता था। करीब आधे घंटे तक आधा दर्जन से अधिक किसान तेंदुए को जाल में घेरे बैठे रहे।
शिकार के लिए निकला था भूखा तेंदुआ
बिनौली (बागपत)। जिस तरह तेंदुआ जाल में फंसा, उससे संभावना है कि वह भूखा था। सूकर या कुत्ते का पीछा करते हुए वह ईंख से शिकार के लिए निकला था। लेकिन जाल में फंस गया।
पिंजरा लगाने की मांग रखी
बिनौली (बागपत)। किसान विनोद कुमार और महिला किसान बबली का कहना है कि क्षेत्र में पिंजरा लगाया जाना चाहिए। इससे पहले शाहपुर बाणगंगा, खपराना, बरनावा, गल्हैता, बरनावा, चंदायन में भी पिंजरा लगाया जा चुका है। लेकिन पहली बार जाल में तेंदुआ फंसा।