बड़ौत (बागपत)।
जैन अनुयायियों के चल रहे दसलक्षण के चौथे दिन अनुयायियों ने उत्तम सोच धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मंदिरों में विधान, पूजा में भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया और रात्रि में संध्या भजन सहित अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दिगंबर जैन युवा समिति द्वारा आयोजित तेरहदीप महामंडल विधान में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक विधि-विधान से किया। इसके बाद पीत वस्त्रधारी इंद्र और इंद्राणी द्वारा नित्य नियम की पूजा और दसलक्षण पर्व की पूजा की। इसके बाद विधानाचार्य के निर्देशन में विधान में सात पूजा कीं । इनमें धातुकी द्वीप पूर्व दिशा, विजय मेरू की धातुद्वीप, चारों दिशा मध्य की विजय मेरू के ईशान, विजय मेरू के पूर्व विधेय संबंधी, विजय मेरू के पश्चिम विधेय संबंधी, रूपांचल पर सिद्धकूट, जिन मंदिर की पूजा विधान में लगने वाले इंद्र और इंद्राणी ने की। बीच-बीच में पंडित आशीष जैन ने विधान की महत्ता बताई। दिगंबर जैन छोटा मंदिर में दिगंबर जैन युवा समिति द्वारा भगवान का अभिषेक किया । नित्य नियम की पूजा तथा दसलक्षण की पूजा की। सायंकाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन युवा मंच के कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत, आरती का कार्यक्रम हुआ। अतिथि भवन मेें कल्याण विधान का आयोजन किया। इस दौरान दिल्ली के कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में अतुल जैन, प्रवीण जैन, सतीश जैन, अमित जैन, विपिन जैन, शील चंद, विपुल कुमार, दिनेश जैन, अतुल जैन आदि रहे।
बड़ौत। उत्तम शोच धर्म को अंगीकार कर दसलक्षण पर्व के चौथे दिन सूरतन सागर महाराज के पावन सानिध्य में श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में जैन श्रद्धालुओं द्वारा दसलक्षण महामंडल विधान के अंतर्गत उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई। प्रात: सर्वप्रथम देवाधिदेव अजित नाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक तथा शांति धारा सौ धर्म इंद्र राकेश जैन द्वारा की गई। इस अवसर पर कुबेर इंद्र द्वारा रत्नों की वर्षा भी की । तत्पश्चात विधान आचार्य मधु दीदी और सीमा दीदी के द्वारा संगीत में नित्य नियम पूजन कराई। इसके अंतर्गत देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान पुष्प दंत पूजन, सोलह कारण पूजन ,पंच मेरू पूजन और दसलक्षण धर्म की पूजन की ।आज पुष्प दंत भगवान का मोक्ष कल्याणक है, अत: सभी जैन श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पुष्पदंत भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित किया। विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए मुनि सूरतन सागर जी महाराज ने कहा कि आज उत्तम शौच धर्म का दिन है अर्थात व्यक्ति को लोभ को त्यागकर उत्तम शौच धर्म अंगीकार करना चाहिए । आज व्यक्ति खुद से संतुष्ट नहीं है, उसकी लोभ की प्रवर्ति बढ़ती ही जा रही है। जिस वजह से वह अनेक प्रकार के पाप में फंसा हुआ है ,वह गलत काम करने से भी नहीं चुकता। अत: व्यक्ति को उत्तम शौच धर्म अंगीकार कर लोभ को दूर करना चाहिए और संतोषी प्रवृत्ति रखनी चाहिए, क्योंकि लोभ ही व्यक्ति को पाप की ओर धकेलता है। व्यक्ति अपने अच्छे बुरे को नहीं पहचान पाता। अत: संयम पूर्वक जीवन व्यतीत कर लोभ छोड़ना चाहिए और उत्तम सोच धर्म को अंगीकार करना चाहिए ।धर्म सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, मुकेश बजाज, वरदान जैन, अशोक जैन ,मदन लाल जैन, इंद्राणी जैन , कृष्णा जैन आदि रहे। रात्रि में गुरु भक्ति आरती तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। विक्रम जैन ने पुरस्कार बांटे।