बागपत। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन दिनों गन्ने की फसल लहलहाने लगी है। पहले साल की फसल (पौधा) की इन दिनों किसान खास देखभाल करने में जुटे हैं। खुदाई के अलावा खाद दी जा रही है। जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में गन्ने की खेती के गेंदा फूल उगाई गई है। ईख के बीच गेंदा खिलने लगा है। उम्मीद के फूल खिलते देख किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं है। किसानों का कहना है कि पहले साल की फसल, जिसे कृषि वैज्ञानिक पौधा कहते हैं के साथ अधिक लाभ कमाने के लिए सह फसली खेती का प्रयोग किया गया है। करीब तीन माह की फूल की फसल से किसानों को लाभ होगा। जबकि गन्ने को कोई नुकसान नहीं है। बरसिया, कमाला, लुहारा, बसौद, गौसपुर सहित कई गांव ऐसे हैं, जिनमें इस बार गन्ने की फसल के बीच गेंदा फूल की खेती को लहलहाते देखा जा सकता है। फूल खिलने से किसान बेहद आशान्वित हैं। कहते हैं कि गन्ने की पैदावार और कटाई में जो खर्च होगा, वह फूल से पूरा कर लिया जाएगा।
एक बीघा में 15 हजार से अधिक का लाभ
बागपत। बरसिया के किसान अनवर का कहना है कि उन्होंने तीन बीघा ईख के बीच गेंदा फूल उगाया है। फूल खिलने शुरू हो गए हैं। दिल्ली मंडी में फूलों की सप्लाई होगी। फूल का भाव किसान का लाभ निर्धारित करता है। पिछले साल में भाव 20 से लेकर 80 रुपये प्रति किलो तक मिले। औसत भाव भी रहा तो प्रति बीघा 15 हजार रुपये का लाभ होने की उम्मीद है। करीब तीन माह की फसल है और गन्ने के पौधे के बड़ा होने से पहले ही फूल की फसल पूरी हो जाती है।
फूल की खेती से नहीं होता कोई नुकसान
बागपत। किसान वीरेंद्र यादव और सुभाष यादव का कहना है कि गन्ने के साथ गेंदा फूल की खेती से कोई नुकसान नहीं होता। खेत की देखभाल जरूर बढ़ जाती है। इसके अलावा खेती को कोई नुकसान न