बागपत। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ लेने वाले 92 जोड़े जिंदगी की नई शुरूआत करेंगे, लेकिन विवाह के बाद नए सवाल भी खड़े हो गए हैं। कई जोड़े ऐसे हैं, जिन्होंने खुद स्वीकार किया कि उनकी शादी पहले हो चुकी है। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने कहा कि ऐसे जोड़ों को योजना में शामिल कराने की जांच होगी। जिसके स्तर से भी गड़बड़ हुई है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
बुधवार को सर्व समाज सुधार समिति और बीडीओ की ओर से योजना में शामिल कराए 101 जोड़ों का विवाह होना था। इनमें से 92 ही विवाह के लिए पहुंचे। एक तरफ निकाह हुए और दूसरी तरफ फेरे पड़े। विवाह के मंडप में बैठे कई जोड़ों ने मीडिया के सामने यह स्वीकार किया कि उनकी शादी पहले हो चुकी है। ऐसे जोड़े भी पहुंचे थे, जिनकी शादी पिछले वर्ष हुई। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार तक मामला पहुंचा। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने ऐसा किया तो गलत है। योजना का लाभ पात्रों तक पहुंचना चाहिए। पूरे प्रकरण की वह अपने स्तर से जांच कराएंगे। अगर ऐसा कोई मामला मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी। यह भी जांच होगी कि ऐसा जोड़ा बीडीओ के स्तर से योजना में शामिल हुआ है या फिर एनजीओ की ओर से शामिल कराया गया है।
किसने क्या कहा?
जिला समाज कल्याण अधिकारी विमल कुमार ढाका ने कहा कि पूरी छानबीन के बाद ही पात्रों की सूची तैयार की गई है। इसके बावजूद अगर ऐसा कोई मामला तो जांच होगी।
बड़ौत के शहर इमाम आरिफ उल हक का कहना है कि दोबारा निकाह कराने से पहला निकाह भी कायम रहता है, लेकिन किसी लालच में फंसकर ऐसा करना गलत है।
पंडित राज कुमार शास्त्री का कहना है कि शादी एक पवित्र बंधन है। लालच के वशीभूत होकर दोबारा फेरे लेने को धार्मिक लिहाज से कतई सही नहीं ठहराया जा सकता।
सर्व समाज सुधार समिति के सचिव लोकेंद्र हेवा का कहना है कि उनकी ओर से 41 जोड़े योजना में शामिल कराए । किसी की भी दूसरी शादी नहीं है। जांच कराई जा चुकी है।
लालच में ऐसे फंसे, मजाक बन गई शादियां
बागपत। सामूहिक विवाह योजना में पात्रों को दिए जाने वाली धनराशि और उपहार के लालच में कई जोड़े दोबारा शादी में शामिल हो गए। पवित्र माना जाने वाला शादी का बंधन भी मजाक बनकर रह गया। एनजीओ का दावा है कि उनकी तरफ से चूक नहीं हुई है। देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या सामने आता है।