बागपत। बजट से किसानों को लुभाने के लिए सरकार ने पुरजोर कोशिश की। खरीफ का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना देने का ऐलान किया। किसान सवाल उठाते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की गई थी, अब तक इसे लागू नहीं किया। बजट में जो वायदे किए हैं, अगर वह धरातल पर उतरे तभी बात बनेंगी।
वित्ती मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को लुभाने के लिए कई बड़े दांव बजट में चले हैं। खरीफ का फसलों का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना देने का ऐलान किया। इसके अलावा नया ग्रामीण बाजार ई-नैम बनाने की घोषणा साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी, लघु एवं सीमांत किसानों के लिए ग्रामीण कृषि बाजारों का विकास करने, फसल को खरीदने, सभी फसलों का समर्थन मूल्य देने और आलू-प्याज और टमाटर के लिए आपरेशन ग्रीन की स्थापना का एलान किया। बजट मेें किए प्रावधान यदि धरातल पर पहुंचे तो निश्चित तौर पर किसानों को लाभ होगा। खरीफ की फसलों को बढ़ावा मिलेगा, यही नहीं सहफसली खेती भी बढ़ सकती है, लेकिन किसानों ने कहा बजट लोकसभा चुनाव से पहले लोक-लुभावन अधिक दिख रहा है।
क्या कहते हैं किसान नेता?
रालोद के छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला कहते हैं कि बजट हकीकत से दूर है। सांसद, राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन बढ़ाने का स्पष्ट एलान किया, लेकिन किसान के लिए हवाई घोषणा की है। किसान, जवान और बेरोजगार को ठगने वाला बजट भाजपा सरकार ने जारी किया है।
भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर कहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2014 में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात कही थी। इसमें प्रावधान था कि किसान को लागत मूल्य 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक यह एलान धरातल पर नहीं उतरा।