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बिना आंखों वाला खेकड़ा का बेटा अंकुर बन गया अर्जुन

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बागपत। कुदरत ने आंख छीनी, लेकिन बागपत के बेटे ने दिलेरी से जिंदगी की मुश्किलों का मुकाबला किया। बचपन में ही आंखों की रोशनी गंवाने वाले 24 साल के अंकुर धामा ने खेल के मैदान पर खुद को साबित कर दिखाया। पैरा एशियाई खेलों की तैयारी में जुटे धामा को अर्जुन अवार्ड से नवाजा जाएगा। दिव्यांग एथलीट की कामयाबी मुश्किलों से डरकर मैदान से हटने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा है।
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होली का त्योहार भले ही लोगों की जिंदगी में रंग भरत हो, लेकिन 20 साल पहले एथलीट अंकुर धामा की आंखों की इसी दिन अंधेरी छा गई थी। अंकुर के भाई गौरव धामा ने बताया कि पांच साल की उम्र में अंकुर की आंखों में रंग चला गया। तमाम इलाज कराया, लेकिन रोशनी नहीं लौटी। परिवार ने उसका दाखिला दिल्ली के लोदी रोड स्थित जेपीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर ब्लाइंड में करवा। यहीं से अंकुर की जिंदगी बदल गई। शिक्षकों ने अंकुर के खेलों के प्रति रुझान को देखते हुए उसे दौड़ में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। अंकुर ने खेल के मैदान पर यह साबित किया कि इच्छाशक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। अंकुर ने साल 2016 के के पैरा ओलंपिक में भाग लिया। 1500 मीटर की स्पर्धा में वह फाइनल में क्वालीफाई करने से चूक गए थे।


पहले अंकुर ने की थी स्वर्णिम शुरूआत
बागपत। अंकुर को पहली बार बड़ी कामयाबी साल 2009 में मिली। वर्ल्ड यूथ ऐंड स्टूडेंट चैंपियनशिप में अंकुर धामा ने दो गोल्ड मेडल जीतकर पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाया था।
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पिछली बार सिल्वर, इस बार लाएगा सोना
बागपत। अंकुर धामा ने साल 2014 में एशियन पैरा गेम्स में एक सिल्वर और दो कांस्य मेडल जीते थे। जकार्ता में इस बार अक्तूबर माह में होने जा रही पैरा एशियन खेलों में अंकुर धामा 1500 मीटर और पांच हजार मीटर दौड़ में भाग लेगा।

रियो में ऐसे टूट गया था अंकुर का सपना
बागपत। ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में 15 सौ मीटर हीट्स के दौरान अंकुर धामा के गाइड विपिन को धक्का दे दिया था, इस कारण वह इन खेलों से बाहर हो गया था। वीडियो से सच का खुलासा होने के बाद पैरा ओलंपिक कमेटी ने तीन घंटे बाद इस पर आपत्ति दाखिल की, लेकिन आपत्ति को खारिज कर दिया था। इस कारण धामा ओलंपिक से बाहर हो गया था।


पढ़ाई के मैदान पर भी अर्जुन है अंकुर
बागपत। दिव्यांग एथलीट अंकुर धामा पढ़ाई के मैदान पर भी युवाओं के लिए प्रेरणा है। आईबीपीएस की ओर से आयोजित होने वाली पीओ की परीक्षा में अंकुर धामा ने सफलता हासिल की । उसके भाई गौरव धामा ने बताया कि परीक्षा में चयन के बाद यूनियन बैंक की दिल्ली स्थित शाखा में सहायक मैनेजर के पद पर तैनात किया है।

अंधेरी दुनिया में हौसले की मशाल से किया उजाला : अंकुर धामा
बागपत। पैरा एशियाई खेलों की तैयारी में जुटे एथलीट अंकुर धामा ने कहा कि बचपन में आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उसकी दुनिया में गहरा अंधेरा था। लेकिन परिवार ने साथ दिया, हिम्मत बंधाई। उसने खुद आगे बढने की ठानी। हौसले की मशाल से उसकी जिंदगी में उजाला हुआ है।
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में जुटा अंकुर कहता है कि जकार्ता के खेलों में देश को दोबारा से पदक दिलाने का सपना है। इसके लिए वह जी जाने से जुटा है। ओलंपिक खेलों में उनके गाइड को धक्का दिया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। युवाओं से कहा कि किसी भी स्थिति में हिम्मत नहीं हारे। हर मुश्किल घड़ी में कहीं न कहीं उम्मीद की किरण जरूर निकलती है। कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।


खेकड़ा में जश्न, मां और भाई ने बांटे लड्डू
खेकड़ा। अंकुर धामा के परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। भाई गौरव धामा, मां संतोष देवी ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई। परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा है। रालोद नेता चौधरी भोपाल सिंह, नेपाल सिंह, दीपक धामा, सुधीर कुमार, सोनू धामा ने अंकुर की सफलता पर खुशी जताई।
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