बागपत। लोकसभा चुनाव से पहले निकाय चुनाव को रिहर्सल की तरह माना जा रहा है। सिंबल से चुनाव पर फैसला नहीं हुआ, लेकिन विधानसभा चुनाव में परचम लहरा चुकी भाजपा जीत के सिलसिले को बरकरार रखने की जुगत में लगी है। भाजपा ने प्रत्येक पालिका और नगर पंचायत का समन्वयक और प्रभारी बनाए हैं। रालोद वापसी चाहती है, जिस कारण पालिका और निकाय के लिए अपने खेमे के संभावित दावेदारों की तलाश की जा रही है।
निकाय चुनाव में टिकट के दावेदारों की बात करें तो इस वक्त भाजपा के हिस्से में लंबी फेहरिस्त है। बागपत, बड़ौत और खेकड़ा पालिका के अलावा नगर पंचायतों के लिए भी टिकट मांगने वालों की बड़ी संख्या में हैं। भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बागपत पालिका का चुनाव है। यहां के आरक्षण का फैसला होने के बाद ही भाजपा अपने पत्ते खोलेगी। सियासत के गलियारों में चर्चा है कि यहां के आरक्षण में बदलाव हो सकता है। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर बताते हैं सिंबल पर चुनाव लड़ने का अभी फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रत्येक पालिका और नगर पंचायत के लिए प्रभारी और समन्वयक बनाए गए हैं। उधर, रालोद ने बड़ौत में ताकत झोंकनी शुरू कर दी है। इस तरह छपरौली, टीकरी, दोघट, बागपत, अमीनगर सराय और खेकड़ा में रालोद सेंधमारी में जुटा है। सपा पहले ही सिंबल पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है। सिंबल के सवाल का भले ही रालोद और भाजपा के पास कोई जवाब नहीं हो, लेकिन इतना तय है कि जिले में सियासत के दिग्गज इस बार के निकाय चुनाव में पत्ते फेंटते नजर आएंगे।