बागपत। राज्यसभा चुनाव में भाजपा की चाल से बसपा को जोर का झटका लगा। रालोद विधायक सहेंद्र सिंह रमाला के वोट से महा गठबंधन की चूल हिल गईं। कैराना लोकसभा के उपचुनाव की तैयारी में जुटे रालोद ने विधायक पर कार्रवाई से महा गठबंधन के साथी सपा और बसपा को संतुष्ट करने की कोशिश की है। फूलपुर-गोरखपुर उप चुनाव में सपा की तरह अगर राज्यसभा में बसपा के उम्मीदवार को जीत मिल गई होती तो रालोद का कैराना सीट पर दावा मजबूत होता।
छपरौली से रालोद के इकलौते विधायक सहेंद्र सिंह रमाला पर आरोप हैं कि उन्होंने राज्यसभा के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की और भाजपा के पाले में जाकर खड़े हो गए। नतीजा यह हुआ कि बसपा के भीमराव अंबेडकर हार गए। इसका सीधा असर लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष की ओर से तैयार किए जा रहे महा गठबंधन पर पड़ता दिखा। कैराना उपचुनाव के लिए रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे रालोद के सामने निष्ठा का सवाल खड़ा हो गया। बसपा प्रत्याशी की हार की समीक्षा हुई और संभावित क्रॉस वोटिंग करने वाले सहेंद्र सिंह रमाला पर कार्रवाई तय की गई। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने इसे पार्टी विरोधी कदम बताया। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी की ओर से जारी किए गए प्रेस बयान में उन पर भाजपा के लिए वोट देने का आरोप लगाया गया।
भाजपाइयों से रिश्ते और भाजपा से रही नजदीकी
बागपत। रमाला गांव के रहने वाले सहेंद्र सिंह रमाला छपरौली से रालोद के पहली बार विधायक बने। भाजपा से उनके रिश्तों की खबर पहली बार सामने नहीं आई है। क्रॉस वोटिंग की संभावना जरूर जताई, लेकिन वह पहले भी भाजपा में रहकर टिकट की दावेदारी कर चुके हैं। इससे पहले वर्ष 2014 में वह भाजपा से लोकसभा चुनाव में बागपत सीट से टिकट के दावेदार थे। कई माह तक उन्होंने क्षेत्र में प्रचार भी किया, लेकिन वर्तमान में केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह टिकट की होड़ में उनसे आगे निकल गए। इसके बाद सहेंद्र सिंह रमाला ने रालोद ज्वाइन की। छपरौली से टिकट तय किया और धुआंधार प्रचार में जुट गए। विधानसभा चुनाव 2017 में वह इकलौते विधायक बनें। चंडीगढ़ में कारोबार करते हैं। भाजपा से नजदीकी का उनका समीकरण यह भी है कि हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु रिश्ते में उनके समधी लगते हैं। कैप्टन अभिमन्यु के भाई वृत पाल सिंधू की बेटी की शादी पिछले वर्ष ही रालोद विधायक के बेटे के साथ हुई । कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच उनकी भाजपा से नजदीकी की बातें होती रही है। रालोद में रहते हुए भी उन्होंने प्रदेश सरकार से जनहित के कई कार्य कराए हैं।
रालोद जीरो, सहेंद्र सिंह ने बचाया था छपरौली का दुर्ग
बागपत। पिछले विधानसभा चुनाव में सहेंद्र सिंह रमाला ने ही छपरौली सीट से रालोद का खाता बचाया था। अन्य सभी सीटों पर रालोद के उम्मीदवार हार हो गए थे। निष्कासन के बाद रालोद के हिस्से में अब एक भी विधायक नहीं है।
मायावती को संतुष्ट करने के लिए की गई कार्रवाई : सहेंद्र सिंह
बागपत। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ विकास कार्य कराए हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप बेबुनियाद हैं। तीन दिन पहले उनकी रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से मुलाकात हुई थी, उन्हें बसपा को वोट देने के लिए कहा ही नहीं गया। रालोद अध्यक्ष ने जो कार्रवाई की है, एक बार उनका पक्ष भी जानना चाहिए था। ऐसा लगता है जैसे मायावती को संतुष्ट करने के लिए उनके ऊपर यह कार्रवाई की गई है।
पार्टी के निर्देशों के खिलाफ गए सहेंद्र : अजित सिंह
बागपत। रालोद के अध्यक्ष अजित सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर सहेंद्र सिंह ने मतदान किया। इस कारण ही उनका निष्कासन किया गया है। पार्टी की नीतियां आम आदमी के हितों के लिए हैं। रालोद महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए बसपा को वोट देना चाहिए था, लेकिन विधायक सहेंद्र सिंह ने भाजपा को वोट दिया, यही वजह है कि उन पर कार्रवाई की गई है। रालोद भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के लिए प्रतिबद्ध है।