बागपत। दिगंबर बड़ा जैन मंदिर में सोमवार को दशलक्षण पर्व में दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की । अष्टम वर्ष पूजाधिकार विधान का आयोजन किया। अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और सर्व साधू परमेष्ठियों को 54 अर्ध्य मंत्रोचार के साथ चढ़ाए।
दशलक्षण पर्व के दसवें दिन मंत्रोचार के साथ भगवान अजितनाथ, शांतिनाथ, नेमिनाथ और पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया और 1008 पार्श्वनाथ की शांति धारा की। नव देवता समूह और दशलक्षण पर्व पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की । इस मौके पर मयंक जैन ने कहा आज का मनुष्य झूठ कपट और मायाचार में पड़ा हुआ है। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किसी को भी शारीरिक या मानसिक कष्ट पहुंचाता है। यह नहीं सोचता मुझे ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए, तभी कल्याण हो सकता है। अष्टम वर्ष पूजाधिकार विधान का आयोजन किया, इसमें अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और सर्व साधू परमेष्ठियों को 54 अर्ध्य मंत्रोचार के साथ चढ़ाए । जैन जागरण मंच ने सामूहिक आरती की, उसमें दीप जलाने आस्था जैन, शांतिधारा का अमित जैन, विधान में श्रीयांस जैन, अतुल जैन, टेकचंद जैन, रूची जैन को शो भाग्य प्राप्त हुआ। नृत्य प्रतियोगिता और हास्य नाटिका कार्यक्रम में विजेताओं को सम्मानित किया । मयंक जैन के निदेशन में धार्मिक कार्य संपन्न हुआ। इसमें विनीत जैन, मनीष जैन, कुनाल, विकास, ऋषभ, नमन, बबीता, संगीता, नीलम, मीनू, लवली आदि रहे।