बागपत। विधायकों के प्रस्ताव पर एक सौ हैंडपंप लगवाने की योजना जनपद बागपत में अभी तक धरातल पर धड़ाम होती नजर आ रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष बीतने को है, लेकिन बागपत में एक भी विधायक के कोटे से शत प्रतिशत हैंडपंप नहीं लगे हैं। बड़ौत विधायक केपी मलिक के खाते के 63 हैंडपंप प्रक्रिया में हैं, लेकिन अभी कार्य पूरा नहीं हो सका है। भाजपा के बागपत विधायक योगेश धामा के हिस्से के सिर्फ 14 हैंडपंप ही लगे हैं। छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला के हिस्से के सबसे ज्यादा 61 हैंडपंप लग चुके हैं।
सूबे की सरकार ने विधायकों को अपने अपने क्षेत्र में लगवाने के लिए एक सौ हैंडपंप आवंटित किए । नियम यह है कि विधायकों की सूची पर जल निगम और प्रशासन योजना को अंतिम रूप देकर हैंडपंप लगवाएगा, लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 की हकीकत चौंकाने वाली है। जल निगम के अधिकारियों के मुताबिक बड़ौत के भाजपा विधायक केपी मलिक ने 63 हैंडपंप का प्रस्ताव किया, लेकिन नाम और स्थान में खामियां मिलीं। दोबारा सूची मंगाई है। हैंडपंप लगाने का कार्य प्रगति पर है। बागपत विधायक योगेश धामा ने सिर्फ 14 हैंडपंप का प्रस्ताव भेजा, इनमें जल निगम ने 14 हैंडपंप लगवा दिए। इसके बाद प्रस्ताव अभी जल निगम को नहीं पहुंचे हैं। छपरौली के भाजपा विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने अभी तक 63 हैंडपंप का प्रस्ताव किया, इनमें से जल निगम 61 हैंडपंप लगवा चुका है।
क्या कहते हैं विधायक
बागपत विधायक योगेश धामा का कहना है कि कुछ हैंडपंप सर्वे में रिजेक्ट हुए थे। पचास हैंडपंप की सूची तैयार है, इसके अलावा जनवरी के आखिरी सप्ताह तक पूरी सूची प्रशासन को भेज दी जाएगी। जिन क्षेत्रों में जरूरत है, वहां पर हैंडपंप लगवाने का कार्य किया जाएगा।
बड़ौत विधायक केपी मलिक का कहना है कि एक सौ हैंडपंप की सूची जल निगम को दे दी है। कार्य प्रगति पर है। सर्वे के बाद जो नाम फाइनल हुए हैं, वहां जल्द ही हैंडपंप लगने का कार्य पूरा कराया जाएगा। जिन क्षेत्रों में अधिक आवश्यकता है, वहां हैंडपंप पहले लगवाए जा रहे हैं।
छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला का कहना है कि शेष हैंडपंप की सूची का प्रस्ताव जल्द ही भेजा जाएगा। उनके हिस्से का 60 फीसदी से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। वह सूची तैयार करा रहे हैं और फरवरी तक ही एक सौ हैंडपंप लगवाने का कार्य कर दिया जाएगा।
पानी के लिए परेशानी कम नहीं
बागपत। जिले के 55 गांव ऐसे हैं, जिनके ग्रामीण पेयजल के लिए तरस रहे हैं। एनजीटी के आदेश पर हैंडपंप उखाड़े जा चुके हैं, लेकिन इन गांवों में हैंडपंप नहीं लगवाए गए। ग्रामीण यहां शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
पाइप पेयजल योजना भी बनीं मजाक
बागपत। पाइप पेयजल योजना भी जिले में मजाक बनकर रह गई है। लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। बागपत के 78 गांवों में पेयजल योजना है, लेकिन धरातल पर कहीं भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।