बागपत। ग्लैंडर्स बीमारी से घोड़ों का पालन करने वाले लोगों में भय का माहौल है। बीमारी होने पर तुरंत चिकित्सकों से उपचार करवा रहे हैं। जबकि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी 12 घोड़ों के नमूने लेकर जांच के लिए भेज चुके हैं। बाहर से आने वाले घोड़े और खच्चरों का जिले में पूरी तरह प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।
घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी का प्रकोप एकाएक बढ़ गया है। जिले में 12 घोड़ों के नमूनों को जांच के लिए पशु चिकित्सा टीम भेज चुकी है। इसमें दो-चार में इस रोग की पुष्टि होनी की संभावना है। मंगलवार और बुधवार तक इसकी रिपोर्ट आ जाएगी, इसके बाद विभाग इन रोग मिलने वाले घोड़ों को मौत के लिए इंजेक्शन लाएगा। इस रोग की आमद से घोड़ा, खच्चर और इस प्रजाति के पशुओं को पालने वाले लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। जरा भी रोग दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकों से उपचार करवा रहे हैं। बीमार होने के डर के कारण अलग-अलग घोड़ों को बंध रहे है, ताकि यह चपेट में न आ जाए। डॉक्टरों से संपर्क बनाएं हुए हैं। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया है। बाहर से घोड़ा या इसकी प्रजाति का कोई भी पशु प्रवेश नहीं करेगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने कहा घोड़े और इसकी प्रजाति के लिए लैंडर्स बीमारी खतरनाक है। पशु पालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ग्लैंडर्स होने से संबंधित घोड़े की मौत निश्चित है।
तीन श्रेणी की होती है ग्लैंडर्स बीमारी
सीवीओ ने बताया कि घोड़े और उसकी प्रजाति में तीन श्रेणी में ग्लैंडर्स बीमारी होती है। पहला निजल ग्लैंडर्स जो इन पशुओं के नाक में होता है। इससे पशु की नाक में जख्म हो जाता है। उसे लगातार पीले-हरे रंग का पदार्थ निकालता है। दूसरा पलमोनरी ग्लैंडर्स इससे पीड़ित घोड़े में सांस की नली में गांठ बन जाती है। इससे पशु को सांस लेने में परेशानी होती है। धसका हो जाता और बुखार की शिकायत बन जाती है। तीसरा कुरेनियस ग्लैंडर्स होता है। इससे पीड़ित घोड़ों के शरीर पर गांठ बन जाती है। इससे फुट कर हरे-पीले रंग का पदार्थ निकालता है। इस रोग में घोड़े की मौत हो जाती है। पशु चिकित्सक विभाग संबंधित घोड़े को मृत्यु का इंजेक्शन लगाकर मारता है।
मुआवजे का है प्रावधान
ग्लैंडर्स रोग से पशु चिकित्सा विभाग उन्हें इंजेक्शन लगाकर मारता है। इसके लिए मुआवजा निर्धारित किया गया है। खच्चर होगा तो उसके मालिक को 16 हजार और घोड़ा होगा तो 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
मानव जीवन के लिए खतरा है ग्लैंडर्स
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि ग्लैंडर्स मानव जीवन के लिए भी खतरा है। इस रोग से पीड़ित घोड़े के संक्रमण की चपेट में आने से मनुष्य भी संक्रमित हो जाते है। घोड़ों में त्वचा, सांस नली और नाक में जिस प्रकार से रोग होता उसी प्रकार से मनुष्य भी पीड़ित होते हैं। मौत तक हो जाएगी। इस लिए जहां भी रोग का संक्रमण होगा, वहां पर लोगों को पूरी व्यवस्था के साथ जाना चाहिए।