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सिराजूद्दीन चिश्ती की दरगाह पर लगेगा अकीदतमंदों का मेला

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बागपत। दुनियाभर में आम की मिठास से पहचान बनाने वाले रटौल गांव में एक बार फिर हिंदु और मुस्लिम भाईचारे की नजीर पेश की जाएगी। मौका होगा अजमेर से ताल्लुक रखने वाले सिराजुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर लगने वाले मेले का। बेटियां दंगल में हुनर दिखाएगी। लोक कला के कलाकार ग्रामीणों का मनोरंजन करेंगे। 23 फरवरी से आरंभ होने जा रहे उर्स के लिए तैयारी शुरू हो गई है।
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रटौल गांव की पहचान रटौल समेत सैकड़ों किस्म के आम को लेकर है, लेकिन पिछले करीब एक सौ साल से गांव में सिराजुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर लगने वाला मेला लोगों को भाईचारे की डोर में बांधता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली के लोग उर्स में दरगाह पर पहुंचकर मन्नत मांगते हैं। भाईचारे के प्रतीक इस मेले की कई खास बातें हैं। दंगल में इस बार महिला पहलवान दमखम दिखाएंगी। चंदगीराम पहलवान के बेटे अर्जुन अवार्डी जगदीश काली रमन पहले दिन मौजूद रहेंगे। सुल्तान फिल्म में जगदीश ने ही कोच की भूमिका निभाई । चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी की महिला पहलवान भी भाग लेगी। मेले में आकर्षक बाजार सजेगा, कुश्ती होगी। इसके अलावा लोक कला ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए स्वांग का आयोजन किया जाएगा।

जयंत चौधरी करेंगे उद्घाटन
बागपत। पूर्व मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन ने बताया कि रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी मेले का उद्घाटन करेंगे। दोपहर तीन बजे दंगल आरंभ होगा।

कौन थे सिराजुद्दीन चिश्ती
बागपत। अजमेर से ताल्लुक रखने वाले सिराजुद्दीन चिश्ती को हिंदू और मुस्लिम बराबर मानते थे। उन्होंने समाज को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। आडंबरों से दूर सादगी भरे जीवन के लिए प्रेरित किया। लंबे समय तक वह रटौल में रहे। करीब एक सौ साल पहले गाजियाबाद के लोनी में उनका देहांत हुआ । निधन के बाद रटौल के लोग गाजियाबाद पहुंचे और उन्हें रटौल लाकर दफनाया । उनकी मजार पर ही वर्तमान में मेले का आयोजन होता है।
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