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नेताजी की नस नस में थी देशभक्ति

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बड़ौत (बागपत)।
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नेताजी सुभाष चंद्र के साथ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नस नस मेें देशभक्ति थी। उन्होंने हमें एकता का पाठ पढ़ाया था। बलिदान दिया है, इसलिए आज लोग खुले में सांस ले रहे हैं।
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बावली गांव के इलम सिंह और हरिपाल कहते है कि उन्होंने गुलामी के दिन देखे है, इसलिए आजादी के दिन का महत्व भी जानते है। हरिपाल बताते है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक निडर और साहसी सिपाही थे। उनके नेतृत्व मेें आजादी की लड़ाई लड़ना गर्व की बात है। नेताजी समय-समय पर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ने वालों लोगों का उत्साहवर्धन करते रहते थे। नेताजी के बलिदानों को भूलाया नहीं जा सकता। बावली के ही दूसरे स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह बताते है कि वह आजाद हिंद फौज मेें थे। देश के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी। हमारी आंखों के सामने युवाओं ने बलिदान दिया। वह खुद भी घायल हुए। नेताजी ने एकता का पाठ पढ़ाया । उनकी नस नस में देशभक्ति थी। युवा पीढ़ी को नेताजी जैसे लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए। अंग्रेजों ने देश पर अत्याचार किए थे। देश में आज भी सैकड़ों समस्याएं हैं। जनसंख्या बढ़ने से समस्याओं ने लोगों को आ घेरा है। इससे निजात मिलनी चाहिए।
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