बागपत। निकाय चुनाव के मद्देनजर बागपत की अधिकतर पुलिस दूसरे जनपदों में चली गई है। इसी कारण जिला कारागार से बंदी पेशी के लिए कचहरी नहीं लाए जा रहे हैं। न्यायिक अधिकारी ही कारागार में पहुंच रहे हैं। वहां पर बंदियों को उनके सामने पेश किया जा रहा है।
जिला कारागार से हर रोज सैकड़ों बंदी पेशी के लिए बागपत कचहरी में आते थे। उनकी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेशी होती थी। प्रदेश में निकाय चुनाव आ जाने के कारण यहां के काफी पुलिसवाले दूसरे जनपदों में मतदान कराने के लिए चले गए हैं। बाकी पुलिसकर्मी अपने जनपद का चुनाव कराने की तैयारी में लगे हुए हैं। पुलिस कर्मियों की कमी को देखते हुए जिला कारागार से बंदी पेशी के लिए बागपत न्यायालय नहीं लाए जा रहे हैं। न्यायिक अधिकारी ही कारागार में पहुंच रहे हैं। वहां पर पुलिसवाले बंदियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर रहे हैं। जेलर सुरेश बहादुर सिंह का कहना है कि निकाय चुनाव में पुलिस लगी हुई है। इसी कारण बंदियों को जेल से कचहरी नहीं ले जाया जा रहा है।
झगड़ा करने से भी नहीं कतराते बंदी
बागपत। कोर्ट में पेशी पर लाते समय बंदी रास्ते में झगड़ा कर देते है। पिछले दिनों 50 हजार रुपये के इनामी अजीत उर्फ हप्पू के साथियों ने कचहरी परिसर में ही पुलिस अभिरक्षा में केस के गवाह के साथ गाली-गलौज कर धमकी दी थी। इस कारण भी अफसरों ने पुलिस की कमी को देखते हुए कारागार में ही बंदियों की पेशी कराने का निर्णय लिया है।