बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा महापर्वाधिराज पर्यूषण पर्व महा फलदायक होता है।
जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में जैन मुनि ने बताया जैन धर्म में महा पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व आठ दिवसीय अध्यात्मिक शिविर हिंदुस्तान भर में चलाया जाता है। इसमें क्षमा का तिलक किया जाता है और तपस्या का हार पहनाया जाता है। उन्होंने कहा 12 प्रकार में तप में से कोई भी एक तप करना आवश्यक होता है। आठ प्रकार के कर्म होते हैं और आठ दिन का ही यह धार्मिक पर्व होता है और आठ प्रकार के कर्म इन आठ दिन की तपस्या में कट जाते हैं। चार प्रकार की गतियों में नरक तिर्युच मनुष्य और देव गति में इस आराधना को महा उत्सव के रूप में मनाया जाता है। देवता भी इस आस्थनिक पर्व को मनाते हैं। बाद में अरुण मुनि ने अंत गढ़ सूत्र का वाचन किया। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, राजीव जैन, संजय जैन, हंस कुमार, कालू जैन, दीपक जैन, अजय जैन, शैल बाला, इंद्राणी, चारू, सुबोध, साधना, पूनम कमलेश आदि रहे।
महावीर के शासन में देसना मिली - सुंदर सागर
बड़ौत। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने विहर्ष सागर सभागार में धर्मसभा में कहा भगवान महावीर ने भी यात्रा शुरू की थी। इतनी विशाल यात्रा की कहां आदिनाथ भगवान के कुल में, भील की पर्याय, शलाका पुरुषों में सम्यक दर्शन प्राप्त कर नारायण बना। ऐसे महावीर के शासन में देसना मिल रही है। इससे पूर्व डॉ. श्रेयासं जैन ने मंगलाचरण किया। इसमें मदनलाल जैन, प्रमोद, अशोक, राशि, त्रिस्ला, सुनीता, इंद्राणी आदि उपस्थित रहे।