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वेदमंत्रों में कोई मिलावट नहीं हो सकती: धनकुमार शास्त्री

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दोघट/ दाहा (बागपत)। आचार्य धन कुमार शास्त्री ने कहा वेदों के मंत्रों में कोई मिलावट भी नहीं हो सकी, क्योंकि प्रत्येक वेद मंत्र, लटा पाठ, जटा पाठ, घन पाठ और ध्वजा पाठ की सरगमों में बंधा हुआ है।
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आर्य समाज मंदिर, निरपुड़ा में चल रहे वेद सप्ताह श्रावणी पर्व के दूसरे दिन शास्त्री ने कहा वेद आदि सृष्टि में परमपिता परमात्मा ने चार ऋषियों के हृदय में प्रेरणा देकर प्रकृति को भोगने का तरीका बताया। वेदों में क्या करना, क्या नहीं करना, इसका विधान है। वेद का ज्ञान साइंस की कसौटी पर खरा उतरता है। अन्य जितने मत मतांत्रों की पुस्तकें हैं वे विज्ञान से डरते हैं, लेकिन वेद का ज्ञान पूर्ण है, इसलिए साइंस के सिद्धांतों पर खरा उतरता है। इसकी कोई भी बात न घट सकी और न ही बढ़ सकी।
इस मौके पर स्वामी अरणर्य मुनि ने कहा वैदिक ज्ञान संसार का उपकार करने के लिए है। इसमें हर प्राणी के उपकार को महत्ता दी। मनुष्य को उपदेश दिया कि वह परमार्थ करें, स्वार्थ न करें। उन्होंने बताया आज वेदों को साइंस के साथ जोड़ कर के प्रचार करने की आवश्यकता है। वेदपाठ देवेंद्र आर्य ने किया। यज्ञ मान वेद पाल राणा रहे। इस मौके पर धर्मवीर सिंह ने भजन प्रस्तुत किया। इसमें पंडित प्रेम चंद शर्मा, मा. जयपाल सिंह, वीरेंद्र सिंह, मा. राम कुमार, वेद भरत, नैन सिंह आर्य, मा. हरबीर सिंह, ब्रजपाल सिंह आदि रहे। संचालन हरपाल आर्य ने किया।
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