बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा दूसरे से अधिक अपेक्षा करना ही दुख का मूल कारण है। जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा हर मनुष्य दूसरों से ज्यादा अपेक्षा करता है, जो सारी पूर्ण नहीं होती। फिर वह दुख महसूस करता है। उन्होंने कहा जैन जीवन शैली में आहार, व्यापार, व्यवहार और आचार शुद्ध रहते हैं। इच्छा कम रखी जाती है। इसकी आशाएं, जितनी अधिक होती है, उसे निराशा भी अधिक मिलती है। यहीं मनुष्य दुख का मूल कारण है। इसके विपरीत मनुष्य अपनी उपेक्षा करता है सोचता है मैं तो कुछ कर नहीं सकता। उन्होंने कहा अपनी आत्मा में रमण करने वाले बनो। भगवान महावीर ने भी अपनी आत्मा में रमण किया था, इसलिए तो आज वे सभी के पूज्य हैं। संत ने कहा व्यक्ति को क्रोध जब आता है, जब दूसरों से बहुत सारी उम्मीद बांध लेता है और वैसा न होने पर उसे गुस्सा आता है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। इसमें जयप्रकाश, राजीव, हंस कुमार, भारत भूषण, अभय जैन, दीपक जैन, अतुल जैन, बाबूराम, वीरसैन, इंद्राणी, सीमा, छवि, सविता आदि रहे।