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प्रकृति पूजा और पुर्नजन्म पर भरोसा करते थे हड्प्पा वाले

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बागपत। सिनौली में चल रहे उत्खनन से इतिहास की कई परतें खुलने की संभावना बन रही हैं। तीसरे चरण में अब तक दो कंकाल मिले हैं। कब्र में सिर और पैर की तरफ मिट्टी के बर्तन बड़ी संख्या में मिले हैं। बर्तनों में अनाज और दाल रखी मिली। पानी पीने के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तन भी रखे मिले, इससे संभावना है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग पुर्नजन्म पर यकीन करते थे। सिनौली के उत्खनन में प्रकृति के प्रेम के ही प्रमाण मिले हैं।
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तीसरे चरण के उत्खनन में अब तक दो मानव कंकाल मिल चुके हैं। पिछले वर्ष यहां पर आठ मानव कंकाल मिले थे। दिलचस्प बात यह है कि प्रत्येक कब्र में कंकाल के सिर की तरफ मिट्टी के बर्तन बड़ी संख्या में रखे मिले हैं। इन बर्तनों में दाल और अनाज भी मिल चुका है। इससे स्पष्ट है कि मरने वाले को जब दफनाया जाता था तो उसकी पसंद और जरूरत की हर चीज को उसके पास मिट्टी के बर्तनों में रखा जाता था। पानी के बर्तन भी मिले हैं। ऐसा सिर्फ सिनौली में ही नहीं बल्कि हरियाणा के राखीगढ़ गांव में मिली कब्रों में भी देखने को मिला था। वहां पर मिली कब्रों के आसपास भी मिट्टी के बर्तन बड़ी संख्या में रखे हुए मिले थे। ताबूत, कब्र पर हड़प्पन लोगों के प्रकृति प्रेम के कई नमूने मिले हैं। हालांकि अभी तक सिनौली में कोई मूर्ति या धार्मिक चिन्ह नहीं मिला है।

मानव कंकाल के डीएनए टेस्ट से खुलेगा राज
बागपत। हरियाणा के राखी गढ़ी गांव में मिले कंकालों का डीएनए टेस्ट कराया, इसमें इतिहास में प्रचलित कई थ्योरी को झटका लगा। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन कहते हैं कि सिनौली में मिल रहे मानव कंकाल का भी डीएनए टेस्ट कराया जाना चाहिए। इससे इतिहास पर पड़ी गर्द से परदा हटेगा। लोगों के सामने स्पष्ट होगा कि सिनौली के लोग किस काल क्रम, सभ्यता से जुड़े थे।
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