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हाईवे पर स्कूल, जोखिम में बच्चों की जान

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बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर स्थित प्राथमिक पाठशाला नंबर एक और दो के सामने भी कुशीनगर जैसा हादसा हो सकता है। फर्क इतना यहां पर हाइवे है। जहां से सैकड़ों वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं। अवकाश होने के बाद बच्चों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है।
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कुशीनगर रेल हादसे ने अभिभावक से लेकर अन्य लोगों को झकझोर दिया है। जिले में मानव रहित क्रासिंग के साथ-साथ हाइवे पर ऐसे दर्जनों प्वाइंट हैं, जिस पर स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल आना और घरों को आना पड़ता है। इस पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। डीएम कैंप कार्यालय से सट्टे सिसाना गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक और दो हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर स्कूलों में जाने को मजबूर हैं। यहां पर न तो कोई स्पीड ब्रेकर है और न ही वाहनों को गति कम करने का दिशा सूचक बोर्ड लगा है। यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन इन सब को नजर अंदाज कर है। प्रतिदिन अभिभावकों को बच्चे के स्कूल से सकुशल घर लौटने की चिंता रहती है। कुछ अभिभावक बच्चे के थोड़ी देर हो जाने पर अध्यापकों से बच्चे के बारे में जानकारी लेने के लिए स्कूल पहुंच जाते हैं।
गांव के ओमपाल, जितेंद्र, सुनील, शिवकुमार, देवेंद्र, गय्यूर ने कहा कई बार जिला प्रशासन के अधिकारियों से स्कूल के सामने हाइवे पर स्पीड ब्रेकर की मांग कर चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा परिवहन विभाग यातायात नियम लागू कराने के लिए गोष्ठी और कार्यशाला आयोजित कर रहा है, लेकिन स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर बनाने की चिंता नहीं है। उधर, एसडीएम अन्नपूर्णा गर्ग का कहना है कि स्कूल के बाहर कोई स्पीड ब्रेकर नहीं है, इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराकर कोई न कोई व्यवस्था जरूर कराएंगे।
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