बागपत। जीएसटी यानि वस्तु एवं सेवा कर के बाद किसानों की मुसीबत बढ़ने जा रही है। यूरिया की कीमत चार रुपये घट गई है, लेकिन डीएपी पर 26 रुपये बढ़े हैं। इससे किसानों को जोर का झटका लगा है। वेस्ट यूपी में अधिकतर किसान डीएपी और एनपीके का प्रयोग करते हैं। दाम बढ़ने से खेती करना और अधिक महंगा होगा।
जीएसटी लागू होने के बाद से खाद के दामों पर संशय बना हुआ था। नया रेट नहीं मिलने के कारण खाद की सप्लाई रोक दी गई थी। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता हरिराज किशोर ने नई रेट लिस्ट जारी कर दी है। वेस्ट यूपी में मुख्य तौर पर तीन तरह की खाद का प्रयोग होता है। इनमें अधिकतर किसान डीएपी, यूरिया और एनपीके टू का इस्तेमाल करते हैं। यूरिया का प्रयोग करने वाले किसानों को आंशिक राहत मिली है। जीएसटी लागू होने से पहले यूरिया की कीमत 330 रुपये थे, जबकि अब 326 रुपये 50 पैसे में यूरिया का बोरा मिलेगा। डीएपी की कीमत पहले 1040 रुपये थे, जबकि अब बाजार में इसकी कीमत 1076 रुपये हो जाएगी। यानि डीएपी पर सीधे 26 रुपये की बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे किसानों को सबसे बड़ा झटका लगा है। एनपीके टू की पहले कीमत थी 990 रुपये, जबकि अब इसकी कीमत हो जाएगी 1061 रुपये। इस खाद का प्रयोग कना भी किसानों के लिए महंगा साबित होगा।
महंगी हो जाएगी किसान की बुग्गी
जीएसटी की मार से अब बुग्गी, ट्रैक्टर और ट्रॉली महंगी होने जा रही है। बुग्गी के टायर पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू की गई है, जबकि ट्रैक्टर के टायर पर सिर्फ 18 प्रतिशत जीएसटी है। इन दिनों अधिकतर बुग्गी लोहे के फ्रेेम वाली बन रही है, इनमें लकड़ी के सिर्फ तख्ते लगते हैं। लोहे पर जीएसटी की दर से इन बुग्गी की कीमत बढ़ेगी। पुराने टायर इस्तेमाल करने वाले किसानों पर महंगाई की मार बढ़ेगी। यानि पुराने टायर पर भी 28 प्रतिशत जीएसटी लागू होगी। अब सवाल यह है कि पुराने टायर की कीमत कैसे तय की जाएगी। रिम एवं धुरा उद्योग कमेटी के अध्यक्ष जय प्रकाश जैन कहते हैं कि यह बेहद निराशाजनक फैसला है।
बैंक उपभोक्ताओं पर सर्विस चार्ज की मार
बैंक उपभोक्ताओं पर भी सर्विस चार्ज बढ़ गया है। जिस सर्विस पर पहले 15 प्रतिशत चार्ज था, अब वहां 18 प्रतिशत लिया जाएगा। इससे एनईएफटी, आरटीजीएस, मैसेज चार्ज समेत बैंक की ओर से मिलने वाली हर सुविधा का अब अधिक शुल्क वसूला जाएगा।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश चौधरी का कहना है कि डीएपी की कीमत बढ़ने से किसानों को सीधा नुकसान होगा। खेती करना महंगा हो जाएगी। जीएसटी से किसान को नुकसान हुआ है।
रालोद के युवा जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर का कहना है कि किसान पहले ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। जीएसटी से खाद की कीमत बढ़ जाने से अब एक ओर मार किसान पर पड़ेगी।