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गौरीपुर में अवैध खनन की जांच में कई पर आंच

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बागपत। गौरीपुर में यमुना की धार मोड़ने और अवैध खनन की शिकायतों के बाद मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम की जांच टीम को कई खामियां मिलीं हैं। जांच टीम ने जिला खनन अधिकारी, लेखपाल, ग्राम प्रधान समेत कई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। लखनऊ तक यह मामला पहुंचा । सात फरवरी को एनजीटी में सुनवाई है, इससे पहले ही जांच के घेरे में आए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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एनजीटी में शिकायत की कि गौरीपुर में यमुना नदी की धार मोड़कर नदी के बीच अस्थायी पुल बनाया है। इस पर अवैध खनन और परिवहन किया। स्थानीय पुलिस प्रशासन का दावा था कि दो पॉकलेन मशीनें जब्त की गई है, लेकिन एनजीटी ने इस कार्रवाई को अपर्याप्त माना। 14 जनवरी को मामले की जांच के आदेश दिए। मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने अपर आयुक्त रजनीश राय, , एसपी क्राइम मेरठ बीपी अशोक, क्षेत्रीय अधिकारी सहायक भू वैज्ञानिक राघवेंद्र सक्सेना की टीम ने गौरीपुर में 14.0224 हेक्टेयर के पट्टे को लेकर की गई अवैध शिकायतों की जांच की। जांच टीम ने पाया कि नदी की दिशा मोड़ने का प्रयास किया, यही नहीं अस्थायी पुल भी बनाया है। जांच टीम ने खनन अधिकारी, पट्टा धारक ग्राम प्रधान, लेखपाल और चौकीदार के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। एनजीटी में मामले की सुनवाई सात फरवरी को है, माना जा रहा है कि इससे पहले ही कार्रवाई हो सकती है।


यमुना के बीच से बना दिया था पुल
बागपत। खनन परिवहन के लिए यमुना नदी के बीच से अस्थायी पुल का निर्माण करा दिया गया था। लेकिन जैसे ही मामला एनजीटी तक पहुंचा, तो पुल को हटवा दिया गया।


एक तरफ जांच, दूसरी तरफ खनन का खेल
बागपत। एक तरफ एनजीटी के आदेश पर जांच का काम चल रहा है, दूसरी तरफ जिले में कई जगह रात में खनन किए जाने की शिकायत की जा रही है। एनजीटी और अधिकारियों से शिकायत कर प्रकरण की जानकारी दी जा रही है। मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने खुद मंगलवार को खनन अधिकारी से सख्त लहजे में कहा कि अवैध खनन की शिकायतें मिल रही है।
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अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
बागपत। यमुना नदी के बीच से अवैध खनन परिवहन का मुद्दा अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ उठाया था। 24 जून 2018 के संस्करण में अवैध खनन परिवहन का मामला प्रकाशित किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने भी पट्टा धारकों पर करीब 80 लाख का जुर्माना लगाया था।


खनन के गड्ढों में डूबकर आए दिन मरते हैं लोग
बागपत। छपरौली से सुभानपुर तक खनन के गड्ढों में डूबकर मरने वालों की संख्या कम नहीं है। 24 जून 2018 को बागपत में यमुना में डूबकर युवक की मौत हो गई थी। काठा में नाव हादसे की वजहों में एक अवैध रेत खनन भी है।
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