पहले खुद जीवन जीना सीखें : सुरत्न सागर
बड़ौत। जैन संत सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि जीवन जीने की भी एक कला है, पहले इस कला को खुद सीखो, फिर दूसरों को श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए प्रेरित करें।
मंगलवार को विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि जब हम खुद जीवन जीना सीख लेंगे। तभी दूसरों को जीने देगे। सबसे पहले ज्ञान और विवेक के साथ अपना जीवन जीए, फिर दूसरों को जीवन जीने की कला बताएं। कहा कि ज्ञानी वही होता है जो पहले अपने घर को जलने से बचाएं और उसके साथ दूसरों की घर की आग बुझाएं।
उधर, मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि मुनि सुरत्न सागर महाराज के सानिध्य मेें आठ अगस्त से 19 अगस्त तक 12 दिवसीय विरागय प्रवचन माला और महामृत्युंजय जाप अनुष्ठान का आयोजन विहर्ष सभागार में होगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।