बागपत। एससी/ एसटी एक्ट में संशोधन के बाद भड़की हिंसा से राजनीतिक दलों का गणित भी बदलना शुरू हो गया है। वापसी के लिए छटपटा रहा रालोद इस बार वेस्ट यूपी में बाबा भीमराव आंबेडकर की जयंती धूमधाम से मनाएगा। दलित मोर्चे के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है। मोर्चे के जिलाध्यक्षों की नए सिरे से ताजपोशी की जाएगी। जाट प्लस के गणित में मुस्लिमों के साथ दलितों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
सियासत के मैदान में भाजपा को रोकने के लिए महा गठबंधन के विकल्प पर दिग्गज का मंथन चल रहा है। एससी/ एसटी एक्ट में संशोधन के बाद भड़की हिंसा ने राजनीति के केंद्र में दलितों को लाकर खड़ा कर दिया। भाजपा डैमेज कंट्रोल में लगी है, लेकिन पहले साल 2014 और फिर 2017 के चुनाव में मात खा चुकी बसपा तीसरी गलती करने के मूड में नजर नहीं दिख रही है। भाजपा-बसपा के बीच रालोद ने भी अपनी चाल चल दी है। इस बार 14 अप्रैल को बाबा भीमराव आंबेडकर की जयंती वेस्ट यूपी में रालोद धूमधाम से मनाएगा। निष्क्रिय पड़े एससी/ एसटी मोर्चे के पुनर्गठन की कवायद भी तेज हो गई है। रालोद के गढ़ बागपत में पुराने बसपा कार्यकर्ता खेकड़ा के धर्म सिंह जाटव को रालोद दलित मोर्चे का जिलाध्यक्ष बनाने जा रहा है। अन्य जिलों में भी ऐसे दलित चेहरे आगे किए जा रहे हैं, जो साल 2019 के लोकसभा चुनाव में दम लगाकर कार्य कर सकें। पूर्व मंत्री एवं राष्ट्रीय सचिव नवाब कोकब हमीद ने कहा दलितों के हित रालोद में सुरक्षित हैं। रालोद सर्वसमाज को साथ लेकर चलता रहा है। रालोद के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह गठीना कहते हैं कि भाजपा का भ्रम टूट चुका है। दलित ही नहीं अन्य वर्गों के वोटों की ताकत से रालोद को कामयाबी मिलेगी।
इसलिए पड़ गई दलितों की जरूरत
बागपत। साल 2014 के लोकसभा और साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जाट वोट की अधिकता वाले रालोद का पत्ता साफ हो चुका है। नतीजे और समीकरण बताते हैं कि अकेले जाट वोटों से रालोद की सत्ता में वापसी संभव नहीं है। साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के चलते जाट - मुस्लिम का समीकरण बिगड़ जाने के कारण दोबारा इसी समीकरण को बनाने की कोशिशें चल रही है, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। ऐसे में जाट वोटों के साथ दोबारा से मुस्लिम के विकल्प के अलावा दलित वोट बैंक पर रालोद का थिंक टैंक काम कर रहा है। यही वजह है कि इस बार संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती पर रालोद सियासी तीर चलाएगा।
दलित हित के यह गिनाए जा रहे काम
बागपत। दलितों के बीच पहुंचकर रालोदिए उनके हित में किए गए कार्यों को भी गिना रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के यूपी के सीएम के तौर पर छात्रवृत्ति की शुरूआत, चकबंदी में दलितों को दिए गए पट्टे और जमींदारी खात्मा कानून से दलितों को हुए लाभ भी बताए जा रहे हैं। प्रदेश महासचिव सुधीर भारतीय कहते हैं कि बड़े चौधरी ने किसान मजदूरों के लिए कार्य किए। दलित वर्ग के लिए किए गए उनके कार्य इतिहास में दर्ज हैं।