आर्य समाज मंदिर में यज्ञ कराया
बड़ौत (बागपत)। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में यज्ञ का आयोजन किया । इसमें आर्यजनों ने आहुतियां दीं। इस दौरान महर्षि दयानंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उन्होंने ही महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाई थी।
कार्यक्रम में डॉ. ओमवीर सिंह आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात में हुआ । उनका बचपन का नाम मूल शंकर था। आठवें वर्ष में स्वामी दयानंद का यज्ञोपवीत संस्कार यथाविधि बड़े समारोह के साथ कराया गया। साथ ही साथ उनको गायत्री एवं संध्या की उपासना विधि भी सिखाई। 14 वर्ष की आयु में दयानंद ने यजुर्वेद संहिता को कंठस्थ याद किया। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में घर त्याग दिया और देश भर में वेदों का प्रचार शुरू किया।
उन्होंने तीन साल तक मथुरा में स्वामी विरजानंद के आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण की। महर्षि दयानंद समाज में व्याप्त कुरीतियों तथा आडंबरों का विरोध कर महिलाओं के स्तर को ऊंचा उठाने, वेदों को पढ़ने और पढ़ाने का अधिकार दिलाने के लिए सदैव तत्पर रहे। इस दौरान बताया गया कि आर्य समाज बड़ौत 18 और 19 फरवरी को दयानंद बाल विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल बड़ौत में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें धर्मेश्वरानंद सरस्वती गुुरुकुल हापुड़, पंडित आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री आगरा एवं भजनोपदेशक प्रियंका आर्या भरतपुर, श्रीपाल आर्य, चरण सिंह मलिक आएंगे। वेदपाठ ओमपाल शास्त्री करेंगे। यज्ञ के ब्रह्मा समर भानु आचार्य रहे। यज्ञमान अंगिरस मुनि रहे। इसमें रामबली राणा, विनोद भारद्वाज, राजकुमार, ओमपाल, नितिन, आकाश, रितिक, गुलाबचंद, सुनील आदि उपस्थित रहे।