बागपत। एनजीटी की रोक के बाद भी जिले में 18 हजार पुराने वाहन प्रदूषण फैला रहे हैं। जबकि एनसीआर क्षेत्र में इनके संचालन पर पूरी तरह पाबंदी है। इसके बाद भी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग का दावा है कि कार्रवाई चल रही है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) का आदेश है कि एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल से चलने वाले वाहन नहीं चलेंगे। इन वाहनों से निकलने वाले धुएं से वायुमंडल दूषित हो रहा है। लोगों को सांस तक लेने में परेशानी होती है। एनसीआर क्षेत्र में शामिल बागपत जनपद पर भी एनजीटी का आदेश लागू है। जिले में आदेश हवा हवाई साबित हो रहे हैं। उप संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार, जिले में 10 साल पुराने डीजल के करीब सात हजार से अधिक और 15 साल पुराने पेट्रोल से चलने वाले करीब 11 हजार से अधिक वाहन हैं। यानी प्रतिबंधित 18 हजार वाहन जिले की आबोहवा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रशासन के सामने इन वाहनों को बंद करवाना कड़ी चुनौती बना हुआ है।
उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन सुरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिबंधित वाहनों के पंजीकरण को निरस्त किया जा रहा है। वाहन चालकों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। जो भी वाहन कार्यालय में फिटनेस के लिए आता है, उसे एनओसी जारी कर दी जाती है। वहीं, अभियान चलाकर वाहनों को बंद करने की भी कार्रवाई की जा रही है।
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ट्रैक्टरों को बंद करना प्रशासन के लिए चुनौती
प्रशासन के सामने किसानों के ट्रैक्टरों को बंद करवाना बड़ी चुनौती है। अधिकतर ट्रैक्टर कृषि कार्यों में प्रयोग किए जा रहे हैं।