अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। मीतली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य जगन्नाथ उपाध्याय ने कहा कि निरक्ष्रर को सुदृढ़ बनाने वाले साधन का नाम संस्कार होता है।
उन्होंने कहा कि मानव में मानवीय गुणों का विकास संस्कारों के माध्यम से ही संभव है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके संतान सद्गुणों वाली बने। राष्ट्र के प्रति नागरिकों का कर्तव्य, नि:स्वार्थ भाव से समाज कल्याण की तत्परता संस्कारों के माध्यम से ही संभव है। सद्गुणों का बीजारोपण बचपन से ही करना पड़ेगा। आधुनिकता के इस दौड़ में हम कितने ही आगे क्यों न हो, परंतु परिवार, समाज और राष्ट्र का उत्थान के लिए संस्कारवान व्यक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मानव में मानवीय गुणों के स्थापना के लिए ऋषियों ने समय-समय पर संस्कारों का बीजारोपण किया, जो अब धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। मानव में मानवता की स्थापना के लिए हमें पुन: संस्कारों को घर-घर पहुंचाना होगा। इसमें सतीश प्रधान, नीरज सिंह, राजबल सिंह, चरण सिंह, मनोज सिंह, मोनू, सोनू, विपिन, राजबाला, सुदेश, उषा, अनिता सिंह, रीना सिंह, दीपांशु और योगेंद्र ठाकुर मौजूद रहे।