बागपत। पर्यावरण की सेहत खराब है। हवा का स्तर बेहद खराब है। दीवाली के समय दिल्ली से भी ज्यादा खराब हवा बागपत की रही थी। बागपत में पांच सौ से अधिक ईंट भट्ठों को भी वायु प्रदूषण की बड़ी वजह माना जाता है। इनमें अधिकतर ईंट भट्ठे नियमों का पालन नहीं करते। यही वजह है कि हवा की सेहत खराब है।
जिले में 245 ग्राम पंचायतें हैं। एक छोर पर हिंडन बहती और दूसरे छोर पर यमुना। दोनों नदियों का पानी पूरी तरह प्रदूषित है। जिसकी वजह से गंदे नाले और कारखानों से निकालने वाला रासायनिक युक्त पानी। वहीं वायु प्रदूषण भी कम नहीं है। जितने जिले में गांव है उससे अधिक भट्ठे हैं। जहां पर प्रदूषित सामग्री जलाई जाती है। यह ही नहीं जगह-जगह ऐसे कारखाने खुले हुए हैं, जहां पर वायु प्रदूषण फैलता है। आसपास की हवा दूषित है। यहां लोगों को सांस तक लेने में परेशानी होती है। प्रशासन की फाइलों में तो कार्रवाई भरपूर होती है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और है। न तो हिंडन को प्रदूषण मुक्त नहीं किया है, ओर न ही भट्ठों को मानक के अनुसार संचालित कराया गया। भट्ठों परी भी प्रतिबंधित सामान जलाया जाता है।
सीडीओ पीसी जायसवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर रहे है। वहीं नियम विरुद्ध कार्य करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
पॉलीथिन अब भी बिगाड़ रही सेहत
वातावरण प्रदूषित होता जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी सबको लोनी होगी। इसे शुद्ध करने की पहल भी हम सबको करनी है। पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, प्राइवेट क्लीनिक चलाने वाले लोगों को दवा के खाली रेपर और इस्तेमाल की गई सीरिंज को सुरक्षित स्थान पर फेंकने या उन्हें नष्ट करने की व्यवस्था करनी होगी। कूड़े ढेर में आग नहीं लगानी चाहिए। फसल अवशेष को हो सके तो न जलाए, उसका खाद बनाया जाए। ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधरोपण करना चाहिए। नदियों को शुद्ध करने में हर व्यक्ति को आगे आना होगा।
सेहत खराब, सांस के बढ़ रहे मरीज
बागपत। शुद्ध हवा नहीं मिलने के कारण लोगों की सेहत खराब होने लगी है। सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सुबह शाम के वक्त भी ताजा हवा नसीब नहीं होना, भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।