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गठबंधन की ख्ुल गई गांठ, इसलिए खिल गया कमल

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बागपत। लोकसभा के नतीजों में अगर बागपत विधानसभा की बात करें तो गठबंधन के पुराने वोट भी रालोद के खाते में शिफ्ट नहीं हो सके। जबकि भाजपा के डॉ सत्यपाल सिंह को पहले से अधिक वोट हासिल हुए। यही वजह रही कि बागपत विधानसभा में करीब 15236 वोट से भाजपा जीत गई।
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बागपत विधानसभा सीट का गणित समझने के लिए पांच साल पहले के आंकड़े पर गौर करिए। साल 2014 में चौधरी अजित सिंह को 26452, सपा के गुलाम मोहम्मद को 50194, बसपा के प्रशांत चौधरी को 24951 वोट मिले थे। यानि इन तीनों के मिलाकर वोट थे एक लाख एक हजार 597। इस बार गठबंधन से चुनाव लड़ा गया। रालोद के रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि गठबंधन के हिसाब से बागपत विधानसभा में आंकड़ा एक लाख के पार हो जाएगा। लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हुआ। बागपत विधानसभा में गठबंधन को सिर्फ 91569 वोट ही मिले यानि पिछले लोकसभा चुनाव के वोटों से भी कम। जाहिर है कि यहां गठबंधन में कहीं न कहीं गांठ पड़ी, जिसकी वजह से इस बार वोटों का प्रदर्शन नहीं दोहराया जा सका। इसके अलावा भाजपा के डॉ सत्यपाल सिंह ने पिछले चुनाव में 83 हजार 333 वोट हासिल किए थे, लेकिन इस बार उन्हें यहां पर एक लाख छह हजार 832 वोट मिले। यानि बागपत विधानसभा में भाजपा के प्रदर्शन में सुधार हुआ है।
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