बागपत। गठबंधन के जिस गणित के भरोसे रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी चुनाव के मैदान में उतरे थे वह बड़ौत में दम तोड़ गया। सपा, बसपा और रालोद के पांच साल पहले के वोट का आंकड़ा भी गठबंधन का प्रत्याशी नहीं छू सका। युवाओं और महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में वोट किया, जिसकी बदौलत सियासी राजधानी बड़ौत के किले में भी कमल खिल गया। रालोद के प्रभाव वाले कई बड़े गांव में भी भाजपा की जीत हुई।
बड़ौत विधानसभा के गणित की बात करें तो रालोद के रणनीतिकारों का मानना था कि साल 2014 के सपा, रालोद और बसपा के कुल वोट 93977 तो उन्हें कम से कम मिलेंगे ही। लेकिन ईवीएम से नतीजे निकले तो गठबंधन के प्रत्याशी जयंत चौधरी को मिले सिर्फ 84772 वोट। यानि पांच साल पहले के वोटों से भी कम। जबकि इस विधानसभा में कई बड़े गांव ऐसे हैं, जिन पर रालोद का असर कहा जाता है। बावली और बिजरौल जैसे रालोद का गढ़ कहे जाने वाले गांव में भाजपा को खूब वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी डॉ सत्यपाल सिंह ने बड़ौत विधानसभा सीट पर हासिल किए 98624 वोट, जबकि साल 2014 में उन्होंने हासिल किए थे 87320 वोट। साल 2019 के चुनाव में गठबंधन उनके पांच साल पहले के वोट के आंकड़े को भी नहीं छू सका। जाहिर है कि वोट शिफ्ट होने में यहां भी मुश्किलें हुई।
------------