बड़ौत (बागपत)। सिनौली गांव एक बार फिर स्वर्णिम इतिहास का साक्षी बना। महिला के कंकाल के साथ आभूषण निकले। इससे पहले साल 2005 में यहां आभूषणों के साथ महिलाओं के कंकाल मिले। करीब साढ़े चार हजार साल पुराने इतिहास से पर्दा उठने की संभावना बन रही है। पिछले वर्ष उत्खनन में गांव में यहां रथ मिल चुका है।
साल 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई ने उत्खनन कराया। यहां पर 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डा. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ। आठ मानव कंकाल, तीन तलवारों के अलावा मृदभांड, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण मिले थे। पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तीन ताबूत, तांबे से सुसज्जित, योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए, जो इतिहास की दुर्लभ हैं। अभी भी इस स्थल पर पुरातत्वविदों को ओर महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष मिलने की संभावना है। एक सप्ताह पूर्व बरसात होने के चलते उत्खनन कार्य बंद हुआ, अब बुधवार को दोबारा से उत्खनन कार्य शुरू किया। दोबारा से उसी खेत में उत्खनन किया जा रहा है, जहां साल 2005 में किया गया था।
चंदायन से निकला था इतिहास
बड़ौत। वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। बरनावा गांव की जमीन में दफन गुत्थियों को भी बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन कोई महत्वपूर्ण चीज नहीं मिली। हालांकि ग्रामीण यहां बार-बार खुदाई कराने की मांग करते चले आ रहे हैं।