बागपत। जिले में लिंगानुपात का अंतर चिंता का विषय है। कन्या भ्रूण हत्या के कई मामले पकड़े जा चुके हैं। प्रशासन ने मिशन 1000 अभियान शुरू किया, सकारात्मक नतीजे मिले, लेकिन अभी भी अंतर बहुत अधिक है। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा कहती हैं कि एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 861 है। जबकि अगर छह वर्ष तक के बच्चों की बात करें तो बागपत में यह आंकड़ा एक हजार के सापेक्ष सिर्फ 841 पर है। यह आंकड़ा चिंताजनक है। पिछले एक साल में भ्रूण की पहचान के कई मामले पकड़े गए, अल्ट्रासाउंड सेंटर भी सील किए गए। सीडीओ पीसी जायसवाल कहते हैं कि बेटियां वर्तमान में किसी से कम नहीं है। सभी लोगों को बेटियों को बचाने और पढ़ाने में सहयोग करना चाहिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी विमल ढाका कहते हैं कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आना होगा। साझा अभियान से ही बेटियों की कम होती संख्या को रोका जा सकता है।
राजनीति में आगे बढ़ रही महिलाएं
बागपत। जिले की बात करें तो महिला मतदाताओं की संख्या सवा चार लाख के करीब है। राजनीति में महिलाएं किसी से पीछे नहीं है। जिला पंचायत की अध्यक्ष रेणू, धामा, खेकड़ा पालिका की चेयरमैन संगीता धामा, दोघट नगर पंचायत की चेयरमैन बबीता चौधरी है। इसके अलावा ब्लाक प्रमुख से लेकर ग्राम प्रधान की कुर्सी पर भी महिलाओं की बड़ी संख्या है।
खेल के मैदान पर बजा दिया डंका
बागपत। शूटर दादी चंद्रो तोमर, प्रकाशो तोमर, नन्ही निशानेबाज डॉली जाटव, तीरंदाज मधु वेदवान, रितिका, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कविता दलाल ने पहचान बनाई है।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रहे कदम
बागपत। लोक सेवा की तरफ से आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा में भी बागपत की बेटियों ने परचम लहराया है। आईएएस परीक्षा में शमां जिले का नाम रोशन कर चुकी है। पूजा त्यागी जज बन चुकी हैं।