बागपत। श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सरूरपुर कलां भक्तामर महामंडल विधान के 21वें दिन सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक किया। उसके बाद शांति धारा और श्री भक्तामर महामंडल विधान में मांडले पर 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। सर्व रिद्धि सिद्धी प्रदाता भक्तामर पूजन की गई।
विधान निदेशक नमन जैन ने गुरु का महत्व बताया। बोले कि गुरु की कृपा मनुष्य को सदैव प्राप्त होती रहती है। बस हमें उसकी भक्ति का एक बीज अपने मन में लगा लेने की जरूरत है। गुरू एक तेज हैं, जिनके आते ही सारे संशय के अंधकार खत्म हो जाते हैं। गुरु वो ज्ञान हैं जिसके मिलते ही भय समाप्त हो जाता है। गुरु वो नदी हैं जो निरंतर हमारे प्राण से बहती हैं। गुरू वो अमृत हैं, जिसे पीकर कोई कभी प्यासा नही रहता है। विधान रजत जैन ने कराया। इसमें लक्ष्य, वैशाली, पूर्ति, मेघा, प्रज्ञा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, अनीता, सपना, जूली, उषा, सुव्रत, अदिति, हंस कुमार जैन आदि रहे।