दोघट (बागपत)। भड़ल गांव में चर्म शोधन इकाइयों के विरोध में ग्रामीणों का धरना आठवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ किया। महिलाएं भी धरने पर बैठी।
वक्ताओं ने कहा कि धरने को आठवें दिन हो गए है लेकिन प्रशासन कुंभकर्ण की नींद सोया हुआ है। चर्म शोध इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी व दुर्गंध के कारण लोगों को सास लेने में भी दिक्कत हो रही है। लोगों को एलर्जी भी हो रही है। चर्म शोध इकाइयों के लिए 1998 में चकबंदी के दौरान गांव के बाहर जगह छोड़ी गई थी, जिसमें आज तक इन इकाइयों को स्थानांतरित नहीं किया गया। चर्म शोधन इकाइयां आज भी घरों में चल रही है।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 21 सितंबर को महापंचायत में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। धरने पर महिलाओं ने पहुंचकर समर्थन दिया और चेतावनी दी कि यदि इकाइयों को गांव से बाहर नहीं किया गया तो वे बच्चों के साथ भूखहड़ताल पर बैठ जाएंगी। धरने पर बैठे लोगों ने बताया कुछ लोगों ने चर्म शोधन इकाइयों से निकलने वाले मलबे को गांव में ही गड्ढे खोदकर दबवा दिया है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना एसडीएम बड़ौत को दी, लेकिन कोई रोकने नहीं आया। सोमवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई सुनील कुमार यश ने गांव में पहुंचकर निरीक्षण किया, जिसकी रिपोर्ट वे उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ किया। यज्ञ पंडित कपिल आर्य ने संपन्न कराया। इस मौके पर पूर्व विधायक वीरपाल राठी, बाबा भोल्लर, इकबाल राणा, प्रधान देवेन्द्र राणा, जितेन्द्र राणा, पूर्व प्रधान विक्रम सिंह, आनन्द छिल्लर, सुनील, रमेश राणा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य तेजपाल सिंह, यशपाल, आंनदपाल, राजीव प्रधान, सुरेश राणा, नरेश, विनोद, कृष्णपाल, प्रमोद, कमल देवी, विमला देवी, राकेश देवी, कृष्णा, बाला, शीला देवी, सुनीता, राजबाला, प्रमिता, अनिता आदि मौजूद रहे।