चौगामा क्षेत्रवासियों को गर्मी के मौसम में बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा। 132 कान्हड़ बिजलीघर ओवर लोड होने के कारण अभी से ही विद्युत कटौती शुरू हो गई है। इस बिजलीघर से क्षेत्र के 13 बिजलीघर जुड़े हैं। इनमें से पांच बिजलीघरों पर ज्यादा लोड है।
132 कान्हड़ बिजलीघर के ओवरलोड होने के कारण चौगामा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति 18 घंटे की बजाय 12 घंटे दी ही जा रही है। इस बिजलीघर से कान्हड़, टीकरी, दाहा, निरपुड़ा, गैडबरा, दोघट, मुलसम, संतनगर, गांगनौली, बामनौली, बिजरौल, कंडेरा, रंछाड़ सहित 13 बिजलीघर जुड़े हैं। इनमें से रंछाड़, बामनौली, गैडबरा, निरपुड़ा, दाहा बिजलीघरों पर ज्यादा लोड है। कान्हड़ बिजलीघर में 40 एमवीए और 60 एमवीए के दो ट्रांसफार्मर हैं। जो सभी बिजलीघरों का एक साथ लोड नहीं उठा पाते हैं। जबकि इस बिजलीघर पर 150 एमवीए का लोड है। कान्हड़ बिजलीघर से जुड़े 13 बिजलीघरों को दो ग्रुप बनाकर बिजली सप्लाई की जा रही है। ए ग्रुप में निरपुड़ा, दाहा, गैडबरा, दोघट फीडर और बी ग्रुप में कान्हड़, टीकरी, रंछाड़, मुलसम,ृ बिजरौल फीडर हैं। सुबह छह से नौ बजे तक और शाम को छह से नौ तक लोड बढ़ जाता है।ं इसलिए एक-एक ग्रुप को चलाया जाता है। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। गर्मी में लोड ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए इस बार गर्मी में क्षेत्रवासियों को बिजली कटौती की समस्या से जूझना पड़ेगा। रंछाड़ के रविंद्र हट्टी का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली की ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन इसी मौसम में सबसे ज्यादा बिजली कटौती की जाती है।
दो बिजलीघर स्वीकृत है
दोघट। चौगामा क्षेत्र में 220 केवीए और 132 केवीए के दो बिजलीघर स्वीकृत है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उक्त दोनों बिजली घरों का निर्माण नहीं हो रहा है। 220 केवीए का बिजलीघर कान्हड़ में लगना था, लेकिन तीन बीघा जमीन कम होने के कारण बिजलीघर नहीं लग पाया। 132 कान्हड़ बिजलीघर के आसपास के किसानों से जमीन के लिए बातचीत की , लेकिन किसानों ने जमीन देने से इंकार कर दिया। वहीं गैडबरा में 132 केवीए बिजलीघर का निर्माण होना था, लेकिन यहां भी 900 मीटर जमीन कम होने के कारण निर्माण नहीं हो सका। जमीन नहीं मिलने के कारण दोनों बिजलीघरों के निर्माण कार्य अटका पड़ा है। क्षेत्र में 18 घंटे बिजली सप्लाई करनी है तो यहां पर दोनों बिजलीघरों का निर्माण होना आवश्यक है।