बिनौली (बागपत)। बरनावा लाक्षागृह स्थित श्री महानंद संस्कृत गुरुकुल विद्यालय में गांधी धाम समिति के तत्वावधान में 59 वें विश्व कल्याण चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन वैदिक विद्वान आचार्य धनकुमार शास्त्री ने वेदोपदेश देते हुए कहा कि वेद शास्वत सत्य है। वेद ज्ञान से ही हम प्रकृति का बेहतर उपयोग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय वाचस्पति परोपकारिणी परिषद के अध्यक्ष आचार्य धनकुमार ने कहा कि परमात्मा का ज्ञान कराने वाला ओम है। वेद परमात्मा से मिलन का माध्यम है, शास्वत सत्य है। वेद को घटाया-बढ़ाया नही जा सकता। वेद की आठ कला हैं, जिनके माध्यम से पता लगता है कि वेद के शब्द को न तो हटा सकते और न ही जोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा वेद के एक मंत्र के अर्थ को सुनकर उसको जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए, तभी मानव जीवन सफल होगा। हमें अपना जीवन को सार्थक करना है तो वेदों की शरण में जाना होगा। वेद ईश्वर का साक्षात रूप व व वाणी है। वेद ज्ञान परमात्मा की अनुपम भेंट है, जिसके द्वारा हम प्रकृति का बेहतर सदुपयोग करते हैं।
पूर्व विधायक एवं रालोद राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र शर्मा ने कहा नारी समाज की निर्माता है, जो बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करती है। उन्होंने कहा, ब्रहलीन कृष्णदत्त जी महाराज के दिव्य ज्ञान से हम सबको प्रेरणा लेकर जीवन को सद्कार्यों में लगाना चाहिए। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरुवचन शास्त्री, अरविंद शास्त्री, आचार्य विनोद कुमार, जयवीर दत्त ने भी वेदोपदेश दिया। प्रात: निशुल्क चिकित्सा शिविर में साधकों को योगाभ्यास कराए गए। डा. अनिल कुमार ने विभिन्न रोगों के निवारण के उपाय बताए। महाशय वीर सिंह गांवड़ी व आचार्य अंकुर भारद्वाज ने भजन प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डा. सोमदत्त, राजाराम आर्य, ओमवीर सिंह, जयपाल त्यागी, धनपाल प्रधान, अजय त्यागी, यशोधर्मा सोलंकी, अशोक कुमार, देवेंद्र शास्त्री, नरेंद्र त्यागी, संजीव आर्य, विजयपाल शास्त्री, सहदेव आर्य आदि मौजूद रहे।