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झूंडपुर में लगेगा यूपी का पहला बेटी वन

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मदन बालियान
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बागपत। बेटियों को बचाने और उनकी परवरिश के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए बागपत के झूंड़पुर गांव में अनोखी पहल होगी। गांव की पांच बीघा भूमि पर बेटी वन लगाया जाएगा। गांव में बेटी के जन्म लेते ही उसके नाम से यहां पौधा लगाया जाएगा। बेटियों के नाम पर ही पौधों के नाम रखे जाएंगे। झूंडपुर यह अनूठी पहल करने वाली यूपी का इकलौता गांव है। वन विभाग ने भी सहमति दे दी है।
बेटियों को बचाने और पढ़ाने के लिए सरकार ने कई अभियान चलाए हैं, लेकिन झूंडपुर गांव के प्रधान संजीव देशवाल ने इस अभियान के लिए अनूठी और प्रेरणादायी पहल की। उन्होंने बताया वन विभाग और प्रशासन से मिलकर गांव में बेटी वन का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए प्रशासन को ग्राम समाज की करीब पांच बीघा भूमि देने की बात कही। गांव में जन्म लेने वाली बेटियों के नाम इस वन में पौधरोपण किया जाएगा। बेटियों के नाम पर ही पेड़ों के नाम रखे जाएंगे। परवरिश की जिम्मेदारी ग्राम समाज और वन विभाग की होगी। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा से दूर रहने के लिए अभियान चलाया है। प्रधान बताते हैं खाका तैयार कर लिया गया है, जल्द ही प्रशासन से मिलकर इसकी शुरूआत होगी।
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क्या कहते हैं डीएफओ
डीएफओ अरुण कुमार बताते हैं कि बेटी वन पर प्रशासन ने भी सहमति जता दी है। ग्राम समाज भूमि देने के लिए तैयार है। पेड़ लगाने वालों से एक सौ रुपये लिए जाएंगे। इसमें पेड़ का खर्च और इसके रख रखाव का काम होगा। उनका कहना है कि यह कोई सरकारी योजना नहीं है, बल्कि ग्राम प्रधान ने खुद ही यह पहल की है।

जन्म ले चुकी बेटियों करेंगी पौधरोपण
बागपत। जो बेटियां जन्म ले चुकी हैं, वह भी पौधरोपण कर अपने नाम का पेड़ लगा सकती है। अभिभावक अपना पंजीकरण कराकर पेड़ लगा सकते हैं, लेकिन सिर्फ बेटियों के नाम पर ही पेड़ लगेंगे।

झूंडपुर में रहते हैं 540 परिवार
बागपत। यूपी के इस अनूठे गांव में 540 परिवार रहते हैं। गांव की जनसंख्या करीब 3885 है। मूल रूप से यहां कृषि कार्य है। हिंडन किनारे बसे गांव के लोग बेटी वन को लेकर उत्साहित हैं।

25 बेटियों से होगी शुरूआत
बागपत। गांव में एएनएम से सर्वे कराया है। इस वर्ष गांव में 25 बेटियों ने जन्म लिया है। इस अभियान के उद्घाटन के दिन इन बेटियों के नाम पर पौधरोपण कर अभियान की शुरूआत होगी।
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क्या है लिंगानुपात की स्थिति
बागपत। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा कहती है कि जिले में एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 861 है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि छह वर्ष की उम्र तक यह संख्या सिर्फ 841 है। सीएमओ कहती हैं कि हालांकि पिछले कुछ सालों में सुधार हुआ है, लेकिन बेटी वन जैसी पहले से लाभ होगा और अन्य गांव के लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
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