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पारा गिरा, पाले से आलू, मटर और सरसों को खतरा

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बागपत। तापमान गिर जाने से ठंड बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। पारे से सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहा है कि पाले से बचाव के लिए किसानों को फसलों की सिंचाई रात में करनी चाहिए। इससे नुकसान कम होने की संभावना रहती है। रात के समय पाला और सुबह के समय कोहरे का प्रकोप बढ़ रहा है। शीत लहर भी परेशानी का कारण बनना शुरू हो गई है। ऐसे में पाला फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। सबसे ज्यादा मटर, आलू और सरसों की फसल को सर्दी से बचाव की ज्यादा जरूरत है। ऐसे में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका रहती है। मटर और सरसों के लिए भी पाला और कोहरा हानिकारक है। नमी होने के कारण इन फसलों में चेंपा रोग लग जाता है।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि झुलसा से बचाने के लिए फसल में पांच सौ लीटर पानी में 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर, मेटाक्सल 80 प्रतिशत और मोकोजेब 64 प्रतिशत का छिड़काव करें। सरसों और मटर की फसल में डाईक्लोरोफोस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। किसी भी फसल में जरूरत से अधिक कीटनाशक का उपयोग न करें। उन्होंने बताया कि दोपहर में दवाओं का छिड़काव न करें। जब हवा चल रही तब भी छिड़काव नहीं करना चहिए। पाला पड़ने पर फसल में हल्की सिंचाई कर दें। इससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

गेहूं के लिए सोना
बागपत। बढ़ती ठंड किसानों की गेहूं की फसल के लिए सोना साबित हो रही है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है वैसे गेहूं की फसल विकसित हो रही है। अगेती फसलों की बिजाई में किसान पानी के साथ साथ खाद बीज डाल चुके हैं। ठंड बढ़ने के साथ गेहूं की फसल में तेजी से बढ़त और फुटाव भी अधिक होगा।
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