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अपने कीट मित्रों का दुश्मन बना किसान - एडीओ

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बड़ौत (बागपत) ।
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एडीओ कृषि तेजपाल चौहान ने बताया कि फसलों को लेकर किसान चिंतित तो है, लेकिन जानकारी के अभाव में वह अपने दोस्तों को ही मार रहा है। किसान खेती में सहायक कीटों को भी दवा का छिड़काव कर मार देता है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है।
एडीओ कृषि तेजपाल चौहान ने बताया कि खेतों में हानिकारक और लाभकारी दोनों तरह के कीट होते हैं। यदि खेत में हानिकारक कीटों की संख्या लाभकारी से काफी अधिक हो तो तभी किसानों को खेतों में कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए। यदि हानिकारक की संख्या कम है तो कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे खेत के लाभकारी कीट भी मर जाते हैं। इससे फायदे के बजाए नुकसान होता है। खेतों में लाभकारी कीट मरने से फसल उत्पादन में कमी, पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है। फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग लगने लगते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक किसान को इन कीटों की पहचान होना जरूरी है। इसके लिए किसान कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि रक्षा अधिकारियों के कार्यालय में जाकर इनकी जानकारी कर सकते हैं। इनकी जानकारी होने पर किसान इस बात का पता आसानी से लगा सकते हैं कि उसके खेत में कौन से कीट अधिक है।
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लाभकारी कीट
बड़ौत। आफेंटलीस कूलन, कैराप्स, गोनियोजस, टेलीनोमस, डेमसैल क्लाइव, मकड़ी, ड्राईनिड, मिडी ग्रास हापर, बर्ड विटल, पीडेरस, ओफिनिया, मीहिड बग, फफूंद, विषाणु व वाटर बग।
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हानिकारक कीट
बड़ौत। हिस्पा, गाल मक्खी, पत्ती मोडक, डेढ़ हर्ट, सफेद बाली, तना भेदक, हॉपर बर्न, सैनिक कीट, गंदी कीट, भूरा, फुदका आदि हैं। जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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