बागपत। किसानों को चीनी मिलों के पेराई सत्र को लेकर इंतजार करना पड़ सकता है। मलकपुर चीनी मिल के पेराई सत्र पर संशय है, जबकि निर्धारित तिथि पर रमाला और बागपत चीनी मिल का पेराई सत्र भी शुरू होता नहीं दिख रहा। चीनी मिलों को अभी तक गन्ना आवंटन तक नहीं किया गया। सहकारी क्षेत्र की दोनों मिलों में इसी माह शुरू कराने की कवायद चल रही है।
मलकपुर चीनी मिल ने 22 अक्तूबर और सहकारी क्षेत्र की रमाला एवं बागपत चीनी मिल ने 25 अक्तूबर से पेराई सत्र शुरू करने की तिथि तय की थी। लेकिन मलकपुर चीनी मिल में अभी मरम्मत का कार्य ही चल रहा है। मिल का पिछला पेराई सत्र देरी तक चला था। गन्ना भुगतान का प्रकरण लटका हुआ है, ऐसे में मिल का पेराई सत्र इस माह शुरू होने की संभावना ही नहीं है। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार किसानों के समक्ष कह चुके हैं कि इस पेराई सत्र में मलकपुर मिल की शुरूआत पर संशय है। मिल क्षेत्र से करीब 40 हजार किसान जुड़े हुए हैं, इन किसानों के सामने गन्ना सप्लाई की समस्या खड़ी हो सकती है।
रमाला चीनी मिल के दोहरीकरण का कार्य अधूरा है। जिस तरह आधी-अधूरी तैयारियां उससे संभावना है कि किसानों को वर्तमान पेराई सत्र में मिल के दोहरीकरण का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि शासन की मंशा मार्च तक ही नई फैक्ट्री को शुरू करने की जिससे वर्तमान सत्र के आखिर में किसानों को लाभ दिया जा सके। चीनी मिल ने 25 अक्तूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी की थी, लेकिन सत्र पिछड़ता नजर आ रहा है। यही हाल बागपत चीनी मिल का है। सहकारी क्षेत्र की दोनों मिलों को इसी माह के आखिर तक या दीवाली से पहले चलाए जाने की योजना है। अब तक चीनी मिलों को गन्ना आवंटन नहीं हुआ है। जिस वजह से क्रय केंद्र भी देहात में नहीं पहुंचे हैं, ऐसे में निर्धारित तिथियों पर पेराई सत्र कैसे शुरू हो सकेगा। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार का कहना है कि शासन की मंशा समय पर पेराई सत्र शुरू कराने की है, जिससे किसानों को समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
सपा कार्यालय प्रभारी सुरेंद्र पंवार कहते हैं कि सरकार को किसान हित में समय पर पेराई सत्र शुरू कराना चाहिए। किसानों को अपने खेत खाली कर गेहूं की बुआई भी करनी होती है।
युवा रालोद के जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर कहते हैं कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। बकाया भुगतान नहीं मिल और अब पेराई सत्र भी समय पर नहीं हो सकेगा।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामकुमार चौधरी का कहना है कि किसान सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं है। यही वजह है कि किसान के हर मुद्दे पर सरकार का रवैया निराशाजनक रहता है।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि किसान समस्याओं का अंत आंदोलन से हो सकेगा। अब किसान अपने हक पाने के लिए आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं है।